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गिरिजा व्यास: शिक्षिका से केंद्रीय मंत्री तक का सफर, उदयपुर में आज कहां होगा अंतिम संस्‍कार

Girija Vyas Funeral Udaipur: राजस्थान की जानी-मानी कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और महिला सशक्तीकरण की पुरजोर आवाज डॉ. गिरिजा व्यास की पार्थिव देह 1 मई 2025 (गुरुवार) देर रात उदयपुर पहुंची। 2 मई 2025 (शुक्रवार) सुबह 10 से 12 बजे तक उदयपुर में दैत्य मगरी स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखी गई। शाम 4 बजे उदयपुर के अशोक नगर मोक्षधाम में अंतिम संस्‍कार किया जाएगा।

गिरिजा व्यास का 1 मई 2025 की शाम को अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वे बीते एक माह से जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थीं। 31 मार्च 2025 को गणगौर पूजा के दौरान गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें अहमदाबाद के जायडस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां गुरुवार शाम 7:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

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डॉ. गिरिजा व्यास का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ था। दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट हासिल करने के बाद उन्होंने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया। वे एक शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका और विचारक के रूप में जानी गईं। उन्होंने आठ पुस्तकें लिखीं, जिनमें 'एहसास के पार', 'सीप, समंदर और मोती', और 'नॉस्टेल्जिया' जैसी काव्य संग्रह शामिल हैं।

गिरिजा व्यास 1977 से 1984 तक उदयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष रहीं

गिरिजा व्यास ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1977 में उदयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में की। 1985 में पहली बार विधायक बनीं और राजस्थान सरकार में मंत्री रहीं। 1991 में वे लोकसभा सदस्य बनीं और पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री का पद संभाला।

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उन्होंने महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और 2005 से 2011 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रहीं। इस दौरान उन्होंने महिला अधिकारों के मुद्दे को प्रभावी रूप से राष्ट्रीय मंच पर उठाया। 2009 में वे चित्तौड़गढ़ से सांसद चुनी गईं और 2013-14 में मनमोहन सिंह सरकार में आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री रहीं।

उदयपुर को शिल्पग्राम गिरिजा व्यास की देन

गिरिजा व्यास न सिर्फ उदयपुर और मेवाड़ की शान रहीं, बल्कि उन्होंने पूरे देश में महिला सशक्तीकरण की सशक्त आवाज को बुलंद किया। उनके प्रयासों से ही उदयपुर को शिल्पग्राम और जयसमंद प्रोजेक्ट जैसी महत्वपूर्ण सौगातें मिलीं। वे मेवाड़ की पहली और एकमात्र महिला केंद्रीय मंत्री रहीं।

कांग्रेस और प्रदेश में शोक की लहर

गिरिजा व्यास के निधन से कांग्रेस और राजस्थान की राजनीति को गहरा आघात पहुंचा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दुख जताते हुए कहा, "डॉ. व्यास का जाना शिक्षा, समाज सेवा और राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक दूरदर्शी, सेवाभावी और सशक्त महिला नेतृत्व की प्रतीक थीं।" प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अहमदाबाद जाकर उनका हालचाल भी लिया था।

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