Girija Vyas Passes Away: नाथद्वारा की बेटी, संसद की आवाज – अब स्मृतियों में रहेंगी गिरिजा व्यास
Girija Vyas Passed Away: भारतीय राजनीति की सौम्यता और साहित्यिक चेतना की आवाज़ आज खामोश हो गई। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास का गुरुवार को अहमदाबाद में दुखद निधन हो गया।
गणगौर पूजा के दौरान चुन्नी में आग लगने से वह करीब 90% झुलस गईं थीं, और पिछले एक महीने से अस्पताल में ज़िंदगी से संघर्ष कर रही थीं। इस खबर से उदयपुर, नाथद्वारा और पूरा मेवाड़ शोक में डूब गया।

डॉ. व्यास: जिनके लिए राजनीति सेवा थी, सत्ता नहीं
मात्र 25 साल की उम्र में विधायक बनीं। चित्तौड़गढ़ और उदयपुर से चुनाव जीते, यहां तक कि गुलाबचंद कटारिया जैसे दिग्गज को हराया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं और महिला आयोग की चेयरपर्सन भी रहीं। स्ट्रीट वेंडर कानून और महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए।
एक कवयित्री, जो सत्ता के गलियारों में भी इंसानियत ढूंढती रही
8 जुलाई 1946 को जन्मीं गिरिजा व्यास ने दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट हासिल कर अमेरिका तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाई। उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और डेलावेयर यूनिवर्सिटी में पढ़ाया। आठ किताबें लिखीं, जिनमें "एहसास के पर" और "सीप, समुद्र और मोती" जैसी रचनाएं शामिल हैं।
सियासत में सादगी की मिसाल
- 1985 में राजस्थान की विधायक बनीं
- 1991, 1996 और 1999 में उदयपुर से सांसद चुनी गईं
- नरसिम्हा राव सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री रहीं
- यूपीए सरकार में शहरी विकास मंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन और राजस्थान कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं
- स्ट्रीट वेंडर कानून और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उन्होंने अहम काम किए
अंतिम विदाई: उदयपुर रवाना हुआ पार्थिव शरीर
डॉ. व्यास का पार्थिव शरीर अब उनके गृह जिले उदयपुर लाया जा रहा है, जहां जनता और समर्थक आखिरी बार उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।












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