JJM Scame Rajasthan: पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के करीबी पूर्व मंत्री महेश जोशी ने ईडी से मांगी 15 दिन की मोहलत
Rajasthan JJM Scam: राजस्थान में जल जीवन मिशन के कथित घोटाले के मामले में पूर्व मंत्री और कांग्रेसी नेता महेश जोशी ईडी के सामने पेश नहीं हुए है और 15 दिन की मोहलत मांगी है।
राजस्थान में कांग्रेस की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के पीएचईडी मंत्री डॉक्टर महेश एक बार फिर ईडी के सामने पेश नहीं हुए है। अब पूर्व मंत्री महेश जोशी ने ईडी से 15 का समय मांगा है।

पूर्व पीएचईडी मंत्री डॉ. महेश जोशी का कहना है कि सभी टेंडर नियमानुसार हुए हैं और ईडी ने जो दस्तावेज मांगे हैं, उनमें जल जीवन मिशन में एक भी गड़बड़ी का जिक्र नहीं है।
जल जीवन मिशन में कथित घोटालों की जांच कर रही ईडी के सामने आज पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी पेश नहीं हुए। ईडी से पूछताछ के लिए पेश होने के लिए 15 दिन की मोहलत मांगी है।
पूर्व मंत्री जोशी ने कहा कि उन्हें 16 मार्च को नोटिस देकर 18 मार्च को दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा गया। इतने कम समय में सभी दस्तावेज इकठ्ठा करना संभव नहीं था इसलिए ईडी से 15 दिन का समय मांगा है।
अब ईडी की ओर से जो जवाब आएगा. उसके हिसाब से आगे देखेंगे. साथ ही उनका यह भी दावा है कि ईडी ने उनसे जो दस्तावेज मांगें हैं. उनमें जल जीवन मिशन में गड़बड़ी का जिक्र नहीं है.
डॉ. महेश जोशी ने आज सोमवार को अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए कहा, ईडी ने बहुत जल्दबाजी का नोटिस भेजा है। उन्हें 16 मार्च को दोपहर में नोटिस मिला और 18 मार्च को सुबह 10:30 बजे पेश होने के लिए कहा गया। साथ ही एक लंबी फेहरिस्त दस्तावेजों की है।
जो मुझे साथ ले जाने हैं, इतने दस्तावेज जुटाने में कम से कम 15-20 दिन लगते हैं। इसका मैंने जवाब भेजकर कम से कम 15 दिन का समय मांगा है। ताकि दस्तावेज जुटा सकूं, क्योंकि बिना दस्तावेज जाने का भी कोई मतलब नहीं है। अब उनके जवाब का इंतजार है।
16 मार्च को ईडी ने महेश जोशी के घर पर और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसे लेकर जोशी ने कहा कि इस सर्च में उनके घर पर कुछ भी नहीं मिला। साथ ही उन्होंने कहा कि यह सिस्टम हो गया है कि दस जगह पर कार्रवाई होगी और इकठ्ठा प्रेस नोट जारी होता है।
दस जगहों पर अलग-अलग क्या मिला, यह नहीं बताया जाता, बल्कि इकठ्ठा क्या मिला यह जानकारी दी जाती है। ऐसा क्यों होता है, यह पता नहीं लेकिन मैं चाहता हूं कि जिसके भी कार्रवाई हो, उसके यहां क्या मिला, यह अलग-अलग बताया जाना चाहिए।
भाजपा में जाने की अटकलों के सवाल पर महेश जोशी ने कहा कि इसका जवाब आप ही दे सकते हो, अटकलें भी आपने लगाई हैं। अब उनको कमजोर या मजबूत भी आप लोग ही कर सकते हैं। मैंने कभी इस बारे में कोई बात नहीं की है।
एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक भाजपा से किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया, लेकिन आरोप तो लगे हैं, जब कोई जिम्मेदार व्यक्ति आरोप लगाता है तो उसका कोई आधार होता है।
मैंने कभी भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल नहीं उठाए, मैं कहता हूं कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष जांच करें, अगर कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करे।
मैं इतना कहना चाहता हूं कि जल जीवन मिशन के किसी भी टेंडर से मेरा कोई लेना-देना नहीं है ,कोई 20 हजार करोड़ कहता है कोई 22 हजार करोड़ कहता है। इतनी राशि के टेंडर तो जब से यह योजना शुरू हुई है। तब से हमारी सरकार के समय में कभी भी नहीं हुए थे। टेंडर की एक प्रक्रिया है और मंत्री का उसमें कोई दखल नहीं होता। न हमारी सरकार के समय और न ही वर्तमान सरकार में।
महेश जोशी ने कहा कि किसी भी मामले में कोई शिकायत आती है तो जांच होती, अब नई सरकार बनने के बाद भी किसी भी टेंडर को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमारी सरकार थी तब पदमचंद जैन नाम के ठेकेदार के खिलाफ एक्शन लिया गया था।
एसीबी ने यह कार्रवाई की थी और उसी के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज किया है। अगर कार्रवाई नहीं करती तो ईडी भी कार्रवाई नहीं कर पाती। जांच एजेंसी कोई भी हो, वो अपनी कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से करे, सच्चाई सामने आनी चाहिए।
महेश जोशी ने दावा करते हुए कहा कि मेरी जानकारी के हिसाब से ईडी को अभी तक जल जीवन मिशन मामले में कोई अनियमितता नहीं मिली है। उनका कहना है कि अगर ईडी को कोई अनियमितता मिलती तो उन्हें दस्तावेजों की जो फेहरिस्त भेजी है। उसमें कम से कम उस गड़बड़ी (जो ईडी ने पकड़ी) का जिक्र होता। अगर कोई संभावित गड़बड़ी होती तो उसके बारे में भी पूछा जाता । मुझे जो सूची भेजी उसमें पीएचईडी से संबंधित किसी भी टेंडर का जिक्र नहीं है।












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