Rajasthan: कोर्ट से बरी होने पर बोले शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कहा-'सारे मामले कांग्रेस राज के हैं'

Rajasthan News: राजस्थान में 6 साल पुराने एक मामले में कोर्ट से बरी होने पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि मैं सिर्फ एक मामले में बरी नहीं हुआ हूं। मैं दर्जनों मामलों में बरी हुआ हूं और आगे भी बरी होऊंगा। मैं यह सब इसलिए कह रहा हूं। क्योंकि सारे मामले कांग्रेस के राज के हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं। मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हत्या मदन दिलावर ने की है। लेकिन आज वह पूरे देश में घूम रहे हैं। भाषण दे रहे हैं। कांग्रेस के लोगों को गाइड कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मेरे खिलाफ कई मामले झूठे हैं। कांग्रेस के लोग इतने नीच हैं कि अपने परिवार के मुखिया को भी मार देते हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग इतने निकृष्ट हैं कि यह लोग अपने परिवार के मुखिया को भी मार देते हैं। इन्होंने जयपुर के संजय सर्किल थाने में मेरे खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हत्या मदन दिलावर ने कर दी है। इस मामले में 302 का मुकदमा मेरे ऊपर दर्ज है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यह अपने परिवार के लोगों की हत्या कर सकते हैं। यह किसी भी नेता की हत्या कर सकते हैं। यह लोग राजनीतिक लाभ के लिए कुछ भी कर सकते हैं। मेरे खिलाफ भी इन्होंने मुकदमे इसलिए दर्ज कराए हैं। ताकि मदन दिलावर कांग्रेस के कुकृत्यों के खिलाफ नहीं बोले। यह लोग मुझे डरने की कोशिश करते हैं।

madan dilawar

नामांकन रैली में गाना बजाने पर हुआ था मामला दर्ज

आपको बता दें कि राजस्थान में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और डीजे मालिक ओम प्रकाश धाकड़ को रामगंज मंडी की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने हाल ही में एक विवादास्पद मामले में बरी कर दिया है। यह मामला नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव के लिए दिलावर की नामांकन रैली के दौरान बजाए गए एक गाने के संबंध में था। जिस पर एक खास समुदाय ने आपत्ति जताई थी। आरोप था कि गाने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई थी।

समुदाय विशेष ने दर्ज कराई थी आपत्ति

विवाद तब शुरू हुआ जब रामगंज मंडी में दिलावर के नेतृत्व में नामांकन रैली के दौरान डीजे मालिक ओम प्रकाश धाकड़ द्वारा बजाए गए एक गाने को लेकर समुदाय विशेष ने आपत्ति दर्ज कराई। आरोप था कि गाने की सामग्री से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसके बाद रामगंज मंडी थाने में मदन दिलावर और ओम प्रकाश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (ए) (1) (बी) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने सबूतों के अभाव में किया बरी

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत का यह फैसला उन आरोपों को खारिज करता है। जिनके तहत दिलावर और धाकड़ पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। अदालत ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। जिसके आधार पर दोनों को बरी कर दिया गया।

मदन दिलावर ने अदालत के फैसले का स्वागत किया

फैसला सुनाए जाने के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मैंने कोई अपराध नहीं किया। उन्होंने अदालत के फैसले पर राहत जताते हुए कहा कि यह उनके लिए न्याय की जीत है। हालांकि दिलावर ने यह भी कहा कि वह अदालत के दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद ही मामले पर विस्तार से टिप्पणी करेंगे।

धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन

यह मामला भारत में धार्मिक भावनाओं की संवेदनशीलता और राजनीतिक रैलियों के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संतुलित करने की चुनौतियों पर प्रकाश डालता है। मदन दिलावर और ओम प्रकाश को बरी किए जाने से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।

मामला यह भी दर्शाता है कि राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर सतर्कता बरती जानी चाहिए। ताकि कोई भी धार्मिक समूह आहत महसूस न करे।

अदालत का यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक विश्वासों के सम्मान के बीच संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। जो विभिन्न धर्मों और सांस्कृतिक समूहों के साथ सह-अस्तित्व के लिए आवश्यक है।

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