Rajasthan: 125 KM प्रतिघंटा की रफ़्तार से आया रेत का बवंडर, 15 साल बाद दिन में हुई रात, देखें Video
Sikar News, सीकर। राजस्थान में बीते चौबीस घंटे के दौरान मौसम ने कई रंग दिखाएं हैं। शेखावाटी और इसके आसपास के इलाके में रविवार शाम को धूलभरी काळी-पीळी आंधी आई वहीं जोधपुर समेत कई इलाकों में ओले व बारिश के समाचार हैं।

(Rajasthan me Tufan) शेखावाटी के चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिले में रविवार शाम को अचानक रेत का बवंडर देख लोगों के होश उड़ गए थे। मौसम विभाग के अनुसार 110 से 125 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से आए रेतीले तूफान के कारण दिन में रात हो गई।

धूलभरी काळी-पीळी आंधी
शेखावाटी के लोगों के अनुसार शाम करीब पौने पांच बजे अचानक धूलभरी काळी-पीळी आंधी आई, जिससे पांच मिनट तक अंधेरा छाया रहा और करीब 37 मिनट तक आसमां में रेत का गुब्बार नजर आया। पांच बजकर 19 मिनट पर आंधी का असर कम हुआ तब लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि रेत के बवंडर के दौरान पूरे इलाके के बिजली गुल हो गई और घरों में धूल की चादर भी जमी नजर आई। तूफान के दौरान सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। लोग जहां के तहां ठहर गए।

29 अप्रेल 2004 को भी आया था ऐसा तूफान
(Dust strom in Rajasthan) राजस्थान के शेखावाटी व इसके आस-पास के इलाके में रेत का यह तूफान करीब 15 साल बाद फिर आया है। इससे पहले 29 अप्रेल 2004 की सुबह साढ़े छह बजे भी ऐसा ही तूफान आया, मगर उस समय अधिकांश लोगों की नींद तूफान से ही टूटी थी।

कुछ भी दिखाई नहीं दिया
(Andhar photos and Video) अंधड़ आने के दौरान चूरू मौसम केन्द्र पर द्रश्यता शून्य मापी गई। रविवार शाम जब रेत का बवंडर आया तब कुछ भी दिखाई नहीं दिया। मौसम विभाग के अनुसार शेखावाटी में तूफान की गति कहीं 110 तो कहीं 125 किलोमीटर प्रतिघंटा आंकी गई है।

विद्युत निगम को करोड़ों का नुकसान
शेखावाटी में करीब 15 साल बाद आए इस अंधड़ से जहां जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया, वहीं विद्युत वितरण निगम को भी करोड़ों रुपए के नुकसान का अनुमान है। अंधड़ के कारण निगम के सैकड़ों खम्भे जमींदोज हो गए और दर्जनों ट्रांसफार्मर भी जल गए।

किसानों की आंखों से बरसा पानी
अंधड़ के जहां आसमां से रेत बरसी वहीं किसानों की आंखों से पानी बरसा, क्योंकि इस समय खेत-खलियानों में रबी की फसल की कटाई चल रही है। अंधड़ की वजह से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। गांव बेरी के किसान महेश ने बताया कि मौसम अब तक साथ दे रहा था, मगर मेहनत के मोती चुनने का मौका आया तो दगा दे गया।












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