Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Independence Day: राजस्थान में फौजियों वाला गांव झुंझुनू का धनूरी, जानिए क्यों है देश के लिए खास

Independence Day Rajasthan News: देश आजादी का जश्न मना रहा है लेकिन इस आजादी को दिलाने वाले स्वतंत्रता सैनानियों और सैनिकों के बिना अधूरा है और फिर बात जब राजस्थान की हो तो इस आजादी के जश्न में लाजवाब हो जाता है।

हम ऐसा इसलिए कह रहे है कि आज भी देश की सीमा पर सुरक्षा करने वाले जवानों में राजस्थान के जवानों की पहचान सबसे अलग है। इस आजादी के जश्न पर आज हम आपकों राजस्थान के ऐसे गांव में लेकर चलेंगे जिसे फौजियों के गांव के नाम से जाना जाता है।

जी हां यह राजस्थान के झुंझुनूं जिले का धनूरी गांव है जिसे लोग फौजियों के गांव के नाम से पुकारते है। यह एक मात्र ऐसा गांव है जहां से अधिकांश परिवारों में से युवा फौज में देश की सीमा पर सुरक्षा को लेकर मुस्तैद है।

dhanuri-of-jhunjhunu-a-village-with-soldiers-in-rajasthan-know-why-it-is-special-for-the-country

राजस्थान का झुंझुनू जिला ऐसा है, जहां के छोटे छोटे गांवों के युवा देश की सेवा कर रहे हैं। यहां एक ही गांव के 18 जवान अब तक शहीद हो चुके हैं। जहां बिते दिनों ही इस गांव में दो जवानों ने अपनी शहादत दी है।

बिते दिनों जुलाई में जम्मू कश्मीर में हुई आतंकी मुठभेड़ में झुंझुनू जिले के दो बेटे विजेंद्र सिंह और अजय सिंह नरूका शहीद हो गए थे। लेकिन क्या आप जानते हैं झुंझुनू जिला ही राजस्थान का एक ऐसा जिला है। जहां सबसे ज्यादा सैनिक वर्तमान में भारत की अलग-अलग सेनाओं में नौकरी कर रहे हैं। इतना ही नहीं यहां के जवान ही सबसे ज्यादा शहीद हुए हैं।

धनूरी गांव के सबसे अधिक सैनिक

झुंझुनूं जिले का एक गांव है धनूरी जो झुंझुनू जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर है। इस गांव की आबादी करीब 3500 है और यहां सबसे ज्यादा कायमखानी मुस्लिम परिवार रहते हैं।

वर्तमान में इस गांव में 600 ऐसे लोग हैं जो सेना में नौकरी कर चुके हैं। करीब 200 लोग तो वर्तमान में नौकरी में है और 400 से ज्यादा रिटायर हो चुके हैं। इसलिए इस गांव को फौजियों के गांव के नाम से भी जाना जाता है।

धनूरी गांव में अब तक शहीद हो चुके हैं 18 बेटे

देश की सीमाओं पर हुए अलग-अलग युद्ध में यहां के कुल 18 बेटे शहीद हो चुके हैं। 1962 में हुए भारत और चीन के युद्ध, 1965 में हुए भारत और पाकिस्तान के युद्ध, 1971 और 99 में कारगिल की लड़ाई में यहां के 18 बेटे देश की हिफाजत करते-करते शहीद हो गए।

यहां सबसे पहले शहीद होने वाले सैनिक का नाम महमूद हसन खान, कुतुबुद्दीन, जफर अली थे जो 1971 में भारत और पाकिस्तान में हुए युद्ध में शहीद हुए।

इनके अलावा मोहम्मद इलियास, मोहम्मद सफी, निजामुद्दीन रमजान,करीम बख्श, अजीमुद्दीन ताज मोहम्मद, इमाम अली,मालाराम सहित अन्य इस गांव के बेटे हैं जो शहीद हो गए।

झुंझुनू के बेटों की कश्मीर में शहादत होने के बाद अब एक बार फिर इलाके के सैनिकों की शहादत हो चुकी है। यहां रहने वाले परिवार आज भी कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे का दुनिया से चले जाने का तो दुख है लेकिन इस बात की खुशी भी है कि उनके बेटे देश की सेवा करते हुए शहीद हुए।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+