Dalpat Singh Rathod : 19 बार फेल होकर बने RAS, 12वीं तीन व 1st ईयर चार बार के प्रयास में पास हुई

पाली, 16 जून। राजस्थान में इस वक्त स्कूलों के रिजल्ट का सीजन चल रहा है। फेल होने पर कई विद्यार्थी निराश हो रहे तो कइयों के परिजन भी उन्हें भला बुरा कहने से नहीं चूक रहे। वैसे जिंदगी में कोई एक असफलता हमारे बढ़ते कदम नहीं रोक सकती। बुलंद हौसलों के दम पर सफलता का शिखर छुआ जा सकता है। इस बात का उदाहरण हैं दलपत सिंह राठौड़।

दलपत सिंह राठौड़ फेल हुए तो भी नहीं छोड़ी मेहनत

दलपत सिंह राठौड़ फेल हुए तो भी नहीं छोड़ी मेहनत

( Dalpat Singh Rathore RAS ) दलपत सिंह राठौड़ वो शख्स हैं, जो स्कूल, कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं में 19 बार फेल हुए। इसके बावजूद आज राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बनकर सेवाएं दे रहे हैं। असफलताओं से इन्होंने हार मानने की बजाय कुछ सीखा और मेहनत करना नहीं छोड़ा। नतीजा हम सबके सामने है।

कौन हैं दलपत सिंह राठौड़?

कौन हैं दलपत सिंह राठौड़?

बता दें कि राजस्थान के पाली जिले के गांव गुड़ाकेसरसिंह के रहने वाले हैं। वर्तमान में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में वित्त नियंत्रक अधिकारी के पद पर पोस्टेड हैं। बार-बार अफसलता मिलने पर इनकी मां सुमन कंवर देवड़ा, पिता मोहन सिंह राठौड़, भाई राजेंद्र सिंह डिगाई ने हिम्मत बंधाई। दलपत सिंह की शादी विनोद कंवर के साथ हुई।

कब-कब फेल हुए दलपत सिंह राठौड़?

कब-कब फेल हुए दलपत सिंह राठौड़?

- 12वीं में असफलता की हैट्रिक बनाई। साल 1993 से 1995 तक लगातार फेल हुए।

- प्रथम वर्ष में बार फेल हुए। 1996 में बीएससी पास नहीं कर पाए तो बीए लिया और 1997 से 1999 तक असफल हुए।

- बीए थर्ड डिवीजन बाई ग्रेस से पास। फिर पीईटी और पीएमटी में फेल हो गए।
- BSTC, कृषि विभाग, STE और नर्सिंग समेत कई परीक्षाओं में असफल हुए।

- सिविल सेवा परीक्षा 2006 में मुख्य परीक्षा पास नहीं कर पाए।

जब दलपत सिंह राठौड़ पास हुए

जब दलपत सिंह राठौड़ पास हुए

- 1991 में 10वीं महज एवरेज नंबर से पास की।

- 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद राजस्थान ग्राम सेवक परीक्षा में चयनित।

- राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2007 में 448वीं रैंक पाकर को-ऑपरेटिव निरीक्षक बने।

- राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2008 में 55वीं रैंक पाई।

महाराणा प्रताप के लेख से हुए प्रभावित

महाराणा प्रताप के लेख से हुए प्रभावित

दलपत सिंह राठौड़ ने बताया कि भले ही पढ़ने-लिखने में अच्छे नहीं रहे और 19 बार फेल होना पड़ा, मगर संघशक्ति नामक पत्रिका में उनके महाराणा प्रताप पर लिखे लेख से प्रभावित होकर उनके साथी प्रभुदयाल सिंह ने उन्हें दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी की सलाह दी। दलपत सिंह ने नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली जाने की अनुमति मांगी तो परिजन हंसने लगे। पिता मोहनसिंह राठौड़ ने तो यहां तक कह दिया कि पांच साल बिना तनख्वाह रहोगे तो घर खर्च कैसे चलेगा?

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