राजस्थान पुलिस का ऑपरेशन एंटीवायरस, साइबर ठगों के साथ प्राइवेट बैंक भी आए रडार पर, यह है बड़ी वजह
Rajasthan Saiber thag News: देशभर के एक दर्जन राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम देने वाले राजस्थान के मेवात इलाके के शातिर ठगों पर राजस्थान पुलिस ने नकेल कसना शुरू कर दिया है।
राजस्थान की अलवर पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ ऑपरेशन एंटीवायरस का अभियान चलाया है और इसी के चलते अब तक करीब 90 हजार से ज्यादा मोबाइल सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके है।
सीम कार्ड ब्लाक करने की राजस्थान में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इतना ही नहीं पुलिस ने कई साइबर ठगों के गिरफ्तार भी किया है।

अलवर पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने बताया संदेह के घेरे में आई 6652 मोबाइल सिम में से 5500 सिम को कराया को बुधुवार को ब्लॉक करवाया गया है। वहीं पिछले डेढ़ साल में साइबर फ्रॉड और संदेह के घेरे में आई 90 हजार मोबाइल सिम कार्ड को ब्लॉक किया जा चुका है।
Alwar में साइबर ठगों पर नकेल कसने की तैयारी pic.twitter.com/Tnfj5lDGAQ
— PURSHOTTAM KUMAR (@pkjoshinews) June 29, 2024
एसपी आनंद शर्मा ने बताया कि साइबर ठगों की संपत्तियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है वहीं ठगी के दौरान काम में लिए गए वाहनों को भी जप्त करने की कार्रवाई की जा रही है। उधर विधिक कार्रवाई के जरिए साइबर फ्रॉड से कमाई संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाने की तैयारी है।
राजस्थान के मेवात इलाके में साइबर फ्रॉड करने वाले अपराधियों के खिलाफ लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। इसमें लिप्त अपराधियों की संपत्ति का ब्योरा एकत्रित किया जा रहा है।जिससे उनकी प्रॉपर्टी को जप्त करने की कार्रवाई की जा सके।
इस संबंध में अलवर पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने बताया कि जिस तरीके से भरतपुर में ऑपरेशन एंटीवायरस चल रहा है। इस पैटर्न पर यह ऑपरेशन अलवर में चल रहा है।
आईजी भरतपुर और जयपुर द्वारा मेवात के पुलिस अधीक्षकों की बैठक ली गई। जिसमें एक खाका तैयार किया गया कि किस तरीके से साइबर फ्रॉड करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने बताया कि इसमें सॉफ्टवेयर है उसे सॉफ्टवेयर के आधार पर उनकी लाइव लोकेशन ट्रेस हो जाती है और उन्हें पकड़कर विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया जाता है।
उस सॉफ्टवेयर से यह भी पता चल जाता है कि कौन सी सिम किन-किन राज्यों में काम कर रही है और फ्रॉड करने में कहा कहा काम आई है।
दूसरे राज्यों में वॉन्टेड अपराधियों को वहां के पुलिस अधीक्षक और थानेदार को पत्र लिखा जाता है और जो हमारे द्वारा गिरफ्तार अपराधी हैं। उनकों उन राज्यों में भेज दिया जाता है।
राजस्थान से बाहर जब कोई अपराधी दूसरे राज्यों की जेलों में जाता है तो एक तो मोरली हरासमेंट होता है और फिर उसका इंफ्रास्ट्रक्चर भी टूट जाता है।
अभी एक दिन पहले ही 6652 मोबाइल सिम सस्पेक्टेड का पता लगाया गया जिनमें से 5500 मोबाइल सिम को ब्लॉक कराया गया। इस तरीके से अलवर पुलिस द्वारा करीब डेढ़ साल में 90000 मोबाइल सिम ब्लॉक कराई गई है।
उन्होंने बताया कि अपराधी इस अपराध के दौरान जो भी व्हीकल यानी संसाधन उपयोग करता है। उसको जप्त किया जाता है। इसके अलावा सबसे बड़ा रोल प्राइवेट एटीएम का होता है। कुछ प्राइवेट एटीएम लगे हुए हैं, जो इनको सर्विस प्रोवाइड कराते हैं। डीजी स्तर पर बैंक अधिकारियों की बैठक ली गई है जिसमें यह बात सामने आई है की कुछ प्राइवेट एजेंसियों ने एटीएम खोले हुए हैं जो साइबर फ्रॉड के काम आ रहे हैं।
उन्ही एटीएम में रूपे डलवाते हैं और वहीं से रूपए निकाल लेते हैं तो बैंकों द्वारा ऐसे एटीएम को भी नोटिस जारी किया गया और जो इस मामले में लिप्त पाए गए हैं। उनको बंद करने कार्रवाई की जा रही है।
इसमें इस बात की भी जानकारी की जा रही है कि जो बड़े साइबर फ्रॉडर हैं वह युवाओं को किस तरीके से जोड़ रहे हैं। उसे नेटवर्क पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके अलावा साइबर फ्रॉड कर अर्जित की गई प्रॉपर्टी को भी चिन्हित कर जा रहा है । उसके बाद उसकी अर्जित संपत्ति को सरकारी और कोर्ट के दायरे में लाकर एक रणनीति के तहत काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस पूरी तरीके से काम कर रही है कि अलवर भरतपुर के मेवात इलाके से साइबर फ्रॉड करने वाले लोगों की कमर टूटे।












Click it and Unblock the Notifications