कर्नल बैंसला प्रतिमा अनावरण: कभी पाकिस्तान की कैद में रहे तो कभी बने गुर्जर आरक्षण आंदोलन का चेहरा
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोनल के सबसे बड़ा चेहरा रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की प्रतिमा का अनावरण आज 13 जून 2024 गांव मूंडिया में हो रहा है।
कर्नल बैंसला की यह पहली प्रतिमा है, जो वियतनाम के पत्थरों से बनवाई गई है। बैंसला की प्रतिमा अनावरण समारोह में राजस्थान सीएम भजनलाल शर्मा समेत राजस्थान के कई बड़े नेता पहुंच रहे हैं।

बैंसला की वजह से मिला था आरक्षण
बता दें कि 31 मार्च 2022 को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन हो गया था। इससे पहले वे राजस्थान में गुर्जरों समेत पांच जातियों को ओबीसी के साथ पहले स्पेशल बैक वर्ड क्लास और उसके बाद मोस्ट बैक वर्ड क्लास का आरक्षण दिला गए।
वसुंधरा राजे सरकार को झुकना पड़ा
गुर्जर आरक्षण आंदोनल संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के साथ अपार जनसमूह था। सबसे पहले साल 2004 में आरक्षण मांगा। फिर रेल रोकी। पटरियों पर बैठे। कई दिनों तक आंदोलन चला। नतीजा यह रहा कि राजस्थान की तत्कालीन वसुंधरा राजे सिंधिया सरकार को गुर्जरों के सामने झुकना पड़ा।
कर्नल किरोड़ी बैंसला का जीवन परिचय
12 सिंतबर 1939 को किरोड़ी सिंह बैंसला का जन्म राजस्थान के करौली जिले के गांव मुड़िया में हुआ। पिता बच्चू सिंह बैंसला के बाद खुद किरोड़ी बैंसला ने भी भारतीय सेना ज्वाइन की और सिपाही से कर्नल पद तक का सफर तय किया।
फौज में भर्ती होने से पहले किरोड़ी बैंसला कुछ समय शिक्षक के रूप में भी काम किया। भारतीय सेना की
राजपूताना राइफल्स में रहते हुए कर्नल बैंसला ने भारत-चीन युद्ध 1962 और भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 में भी हिस्सा लिया।
साल 1965 के युद्ध में कर्नल किरोड़ी लाल बैंसला को पाकिस्तानी फौज ने पकड़ लिया था। कई महीनों तक पाकिस्तान की कैद में रहे। वहां पर उन्हें प्रिजनर्स ऑफ वॉर( युद्धबंदी) बनाकर रखा गया। खूब टॉर्चर किया गया।
पाकिस्तान की जेल में टॉर्चर झेलने के बावजूद कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला कोई राज नहीं उगलवा पाए। वो पाकिस्तान के चंगुल छूटकर इंडिया आए और फिर साल 1991 में सेना से रिटायर हो गए थे। 2000 के दर्शक की शुरुआत में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के लिए सक्रिय हो गए थे।












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