CM गहलोत ने BJP-RSS पर लगाए दंगे करवाने के आरोप, बोले-'राजस्थान में नहीं चलने देंगे हिंदुत्व एजेंडा'
विधानसभा चुनाव 2023 से पहले राजस्थान सीएम अशोक गहलोत व मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने भाजपा, आरएसएस व बजरंग दल पर निशाना साधा है।
'भाजपा और आरएसएस के लोग दंगे करवाते हैं। जनता को धर्म के नाम पर भड़काते हैं। लड़ाते हैं। भाजपा तो गाय को लेकर भी राजनीति करने से नहीं चूक रही जबकि गौसेवा कांग्रेस करती आई है।'
यह कहना है राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का। जालौर के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में सीएम अशोक गहलोत ने आरएसएस व भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए।

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस गाय के नाम पर वोटों की राजनीति नहीं करती, तो क्या हम हिंदू नहीं है। कुछ लोग तो सिर्फ राम मंदिर की राजनीति के लिए ही हिंदू बन गए थे।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि
राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का हिंदुत्व वाला एजेंडा नहीं चलने दिया जाएगा। राम मंदिर की राजनीति के लिए ही हिंदू बनने वाले का हिंदू धर्म से कोई वास्ता था ही नहीं। राजनीति के लिए हिंदू धर्म को नहीं मानने वाले लोग भी हिंदू बन गए थे।
उधर, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बजरंग दल पर निशाना साधा है। बजरंग दल को बैन करने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि जो भी दल प्रदेश में नफरत फैलाएगा, उस पर बैन लगाया जाएगा। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी है।
मध्य प्रदेश के शाजापुर में कमलनाथ ने कहा कि बजरंग दल हो या फिर कोई और दल। जो भी देश व समाज में नफरत फैलाने का काम करेगा, हर उस दल पर कांग्रेस की सरकार बनी तो बैन लगाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि साल 2023 के अंत मध्य प्रदेश व राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। साल 2018 में दोनों प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। मध्य प्रदेश में कमलनाथ व राजस्थान में अशोक गहलो सीएम बने। इसी तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया व सचिन पायलट को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी मिली थी।
सिंधिया व पायलट को अपनी ही पार्टी की सरकार से नहीं बन पाई। सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में चले गए और केंद्रीय मंत्री बन गए। सिंधिया के जाते ही कमलनाथ की सरकार गिर गई और सत्ता वापस भाजपा के हाथ में आ गई। शिवराज सिंह चौहान सीएम बन गए।
इधर, राजस्थान में सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायक के साथ मानेसर के होटल में डेरा डाल लिया था। सचिन पायलट से डिप्टी सीएम व पीसीसी चीफ पद दोनों छिन गए, मगर अशोक गहलोत सरकार बची रही।












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