Borewell Rajasthan: राजस्‍थान के कोटपूतली में 700 फीट के बोरवेल में फंसी चेतना को बचाने 170 फीट नीचे उतरे जवान

Borewell Rajasthan: कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी चेतना को बचाने के प्रयास जारी हैं। बचाव दल 10 फीट गहरी सुरंग खोदने के लिए 170 फीट नीचे उतर रहे हैं। हालांकि, अधिकारी इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि ऑपरेशन में कितना समय लगेगा? दो कर्मचारी एक साथ काम कर रहे हैं और इस काम के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं।

चेतना को बोरवले से सुरक्षित निकालने के प्रयास फेल हो रहे हैं। इसलिए बार-बार नया प्‍लान बनाना पड़ रहा है। इस बीच भारी बारिश के कारण बचाव अभियान में देरी हुई है। चेतना के परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उसके चाचा शुभराम ने शनिवार को निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी उदासीन हैं। उन्होंने कहा, "अगर बहुत पूछा जाए तो वे कहते हैं कि कलेक्टर मैडम बताएंगी, वे अभी सो रही हैं।"

Borewell Rajasthan Rescue

चेतना रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन राजस्‍थान: बारिश के कारण पाइपों पर वेल्डिंग का काम बाधित हुआ

गुरुवार रात से हो रही बारिश ने बचाव कार्य में काफी बाधा डाली है। एनडीआरएफ के प्रभारी योगेश कुमार मीना ने बताया कि बारिश के कारण पाइपों पर वेल्डिंग का काम बाधित हुआ। मीना ने बताया, "हमने अंदर जो 5 पाइप डाले हैं, उन्हें वेल्डिंग कर रहे थे, लेकिन बारिश के कारण समस्या आ रही है।" पाइपों के वजन के कारण टीम को 100 टन क्षमता वाली हाइड्रा मशीन खरीदनी पड़ी।

चेतना रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन राजस्‍थान: बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रही मां

चेतना की मां ढोले देवी बहुत दुखी हैं और अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रही हैं। वह बार-बार हाथ जोड़कर अपनी बेटी को बचाने की भीख मांगती नजर आ रही हैं। शनिवार की सुबह सैनिकों को मशीनों का इस्तेमाल करते हुए नीचे भेजे जाने के बाद अभियान नए जोश के साथ फिर से शुरू हुआ।

23 दिसंबर से बोरवेल में फंसी है कोटपुतली की चेतना

दो दिन पहले पाइलिंग मशीन की मदद से बोरवेल के समानांतर एक गड्ढा खोदा गया था। उम्मीद है कि रैट माइनर्स पाइप के ज़रिए इस गड्ढे में उतरेंगे और फिर बोरवेल से जोड़ने के लिए सुरंग खोदेंगे। हालाँकि, यह योजना अभी तक क्रियान्वित नहीं हुई है। चेतना सोमवार (23 दिसंबर) को बोरवेल में 150 फीट की गहराई पर फंस गई थी। स्थानीय तरीकों का इस्तेमाल करने के बावजूद, वह सिर्फ़ 30 फीट ऊपर जाने के बाद भी फंसी हुई है। बच्ची लगभग 116 घंटों से बिना भोजन या पानी के है और चार दिनों से उसमें कोई हरकत नहीं दिखी है।

चेतना को बचाने में क्‍या दिक्‍कतें आ रही हैं?

सुरंग में प्रवेश करने वाले सैनिकों पर लगातार निगरानी रखी जाती है। ऑपरेशन के दौरान समन्वय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाहर मौजूद टीम के सदस्य वॉकी-टॉकी के ज़रिए उनसे संपर्क बनाए रखते हैं। शुक्रवार रात भारी बारिश के कारण बचाव अभियान को कई बार रोकना पड़ा। आखिरी पाइप की वेल्डिंग उस शाम करीब 8 बजे पूरी हुई। टीमें आगे की कार्रवाई के लिए तैयार होने के साथ ही हाथ से खुदाई के लिए जरूरी औजारों की जांच जारी रखती हैं।

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