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LokSabha Election: लोकसभा चुनावों की हॉट सीट क्यों बनी चित्तौड़गढ़ सीट,जानिए सीपी भारी या आंजना मजबूत

LokSabha Election: राजस्थान में भाजपा के बाद कांग्रेस की जारी लोकसभा चुनावों के प्रत्याशियों के नामों के ऐलान के बाद अब 10 लोकसभा सीटों पर तस्वीर साफ हो गई है।

भाजपा ने जहां राजस्थान की 25 सीटों में से 15 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान पहले ही कर दिया और बिते दिन देर शाम कांग्रेस की ओर से 10 सीटों पर नामों की घोषणा कर धुरंधरों को मैदान में उतार दिया।

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आज कांग्रेस के 10 धुरंधरों और भाजपा के 15 चुनावी धुरंधरों में सबसे पहले बात करेंगे हॉट सीट बनी चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट की।

चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा से जहां प्रदेशाध्यक्ष और दो बार से लगातार सांसद सीपी जोशी को तीसरी बार प्रत्याशी बना गया है। तो वहीं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना को प्रत्याशी बनाया है।

कभी मेवाड़ की राजधानी रहा चित्तौड़गढ़ हमेशा से राजनीति का केंद्र रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव में भी चित्तौड़गढ़ की संसदीय सीट हॉट सीट है।

राजस्थान में विधानसभा में भाजपा की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी यहां से भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोलते हुए पहली सूची में कांग्रेस के कद्दावर माने जाने वाले यहां से पहले सांसद और बाद में राजस्थान सरकार में निंबाहेड़ा से विधायक बनकर कैबिनेट मंत्री बने उदयलाल आंजना को टिकट दिया है।

ऐसे में इस सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रप्रकाश जोशी(CP JOSHI) यहां से लगातार दो बार सांसद बने हैं और दोनों ही बार उन्हें बाहरी प्रत्याशियों का सामना करना पड़ा जिससे उनकी राह आसान रही है।

साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में देश की मोदी लहर का सीधा फायदा भी प्रदेशाध्यक्ष जोशी को मिला। कांग्रेस ने पहले दो बार हुई गलतियों से सबक लेते हुए इस बार स्थानीय प्रत्याशी को मैदान में उतारा है ऐसे में दोनों पार्टियों की तस्वीर साफ होने के बाद यदि कोई तीसरा मोर्चा यहां खड़ा होता है तो चुनाव और भी रोचक हो जाएंगे।

सीधे तौर पर मेवाड़ की यह प्रमुख सीट प्रदेश की राजनीतिक का केंद्र बिंदु है क्योंकि यहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सामने कांग्रेस की अनुशासन कमेटी के अध्यक्ष चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

लोकसभा चुनाव को लेकर अभी अधिकृत घोषणा भी नहीं हुई है उससे पहले चुनाव के रुझान को लेकर कुछ भी कहा जाना सीधे तौर पर संभव नहीं है लेकिन यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि चित्तौड़गढ़ की लोकसभा सीट पर आने वाले समय में रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा।

चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट का क्या है पूरा इतिहास
1952 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे जिसमें जनसंघ के प्रत्याशी के तौर पर उमाशंकर त्रिवेदी ने अपनी जीत दर्ज कराई थी।

उसके बाद कांग्रेस के मानिक लाल वर्मा, ओंकार लाल बोहरा सांसद बने तो 1971 में भारतीय जन संघ के विश्वनाथ झुनझुनवाला सांसद निर्वाचित हुए।

वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के श्याम सुंदर सोमानी सांसद बने। 1980 में इस सीट पर कांग्रेस की वापसी हुई जब निर्मला कुमारी शक्तावत में कांग्रेस आई से इस सीट पर सांसद निर्वाचित हुई।

लगातार दो बार सांसद बनने के बाद 1989 में महेंद्र सिंह मेवाड़ इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद बने तो 1991 से लेकर 96 तक केंद्र में रक्षा मंत्री रहे जसवंत सिंह इसी संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हुए।

1998 में पहली बार कांग्रेस से संसद का चुनाव लड़े उदयलाल आंजना सांसद बने तो मध्यावधि चुनाव के बाद श्री चंद कृपलानी सांसद बने। जिनको 2009 में पूर्व केंद्रीय भुतल परिवहन मंत्री कुमारी गिरिजा व्यास ने हराया और उसके बाद 2014 में पहली बार चंद्र प्रकाश जोशी सांसद बने वहीं 2019 में भी जोशी निर्वाचित घोषित किए गए अब तीसरी बार उनका मुकाबला साल 1998 में सांसद रहे उदयलाल आंजना से होगा जो पिछली विधानसभा में राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं।

यह है सीट की स्थिति
चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट पर लगभग 21 लाख से अधिक मतदाता है जिनमे 5 लाख से ज्यादा मतदाता नव मतदाता है जो पहली बार मतदान करेंगे।

जातिगत समीकरण कि यदि बात की जाए तो यहां लगभग चार लाख राजपूत मतदाता है वही लगभग 3 लाख वैश्य वर्ग के मतदाता हैं जिन्हें सामान्य श्रेणी में गिना जाता है इसी के साथ इतनी ही संख्या में ब्राह्मण मतदाता है।

इसके बाद लगभग ढाई लाख जाट मतदाता है तो अन्य वर्गों में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आदिवासी मतदाता, ओबीसी वर्ग और दलित वर्ग के मतदाता हैं।

लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 60 से 62 के आसपास रहता है और वोटिंग परसेंटेज बढ़ने वाला फायदा को मिलता है। हालांकि सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में माना जा रहा है लेकिन भील आदिवासी पार्टी ने भी लोकसभा में अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है ऐसे में इसका सीधा नुकसान दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों को उठाना पड़ेगा ।

तीन जिलों में फैला है लोकसभा का संसदीय क्षेत्र
चित्तौड़गढ़ लोकसभा का संसदीय क्षेत्र चित्तौड़गढ़ के अतिरिक्त प्रतापगढ़ और उदयपुर के कुछ हिस्से तक फैला हुआ है। इस संसदीय क्षेत्र में चित्तौड़गढ़ जिले की चित्तौड़गढ़ बड़ी सादड़ी बेगू निंबाहेड़ा और कपासन सीट के साथ प्रतापगढ़ मुख्यालय सीट उदयपुर जिले की वल्लभनगर और मावली सीट शामिल है।

वर्तमान में लोकसभा क्षेत्र में शामिल 8 विधानसभा सीटों में से 6 विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है तो एक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय विधायक बने चंद्रभान सिंह विधायक हैं।

ऐसे में भाजपा की यह सुरक्षित सीट मानी जा रही है। सीधे तौर पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही भाजपा अपनी जीत के प्रति अस्वस्थ दिख रही है लेकिन उदयलाल आंजना का नाम घोषित होने के बाद कांग्रेस में भी उत्साह दिखाई दे रहा है।

वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने चित्तौडगढ संसदीय सीट से चुनाव लड़ा तो उनके सामने दोनों बार गिरजा जोशी और गोपाल सिंह ईडवा के रूप में बाहरी प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे।

कुमारी डॉ.गिरिजा व्यास उदयपुर से चुनाव लड़ने चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट पर आई थी तो गोपाल सिंह नागौर से चित्तौड़गढ़ लोकसभा में चुनाव लड़े थे।

ऐसे में जोशी का पहली बार तीसरी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में स्थानीय प्रत्याशी उदयलाल आंजना से सामना होगा। प्रदेश अध्यक्ष जोशी जहां पूरे राजस्थान में भाजपा संगठन की कमान संभाले हुए हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में उदयलाल आंजना को स्थानीय होने का फायदा मिलेगा।

हालांकि लोकसभा चुनाव में विकास और केंद्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाता है ऐसी स्थिति में भाजपा खुद को मजबूत मान रही है रेलवे सड़क और चिकित्सा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को लेकर भाजपा चुनावी रण जीतने की तैयारी में जुटी हुई है।

चित्तौडगढ संसदीय सीट पर जाति का समीकरणों के अतिरिक्त अफीम किसान वर्ग का एक बड़ा फैक्टर है जो इन लोकसभा चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

चित्तौड़गढ़ प्रतापगढ़ उदयपुर के क्षेत्र को अफीम उत्पादक क्षेत्र माना जाता है और एक बड़े किसान वर्ग की प्रमुख आय का स्रोत अफीम की लाइसेंस खेती है।

विगत 10 सालों में अफीम किसानों को लेकर मौजूदा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जोशी का फोकस रहा है अफीम किसानों को अफीम नीति के जरिये फायदा पहुंचाने का पूरा प्रयास भी केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है।

बड़ी संख्या में कम औसत और विभिन्न छोटे-मोटे कारणों से काटे गए अफीम किसानों के अफीम लाइसेंस फिर से मिले हैं वहीं अफीम खेती के योग्य कृषि भूमि का क्षेत्रफल भी बढ़ाया गया है।

लगातार अफीम नीति में संशोधन कर किसानों के हितों में अफीम नीति को बनाने को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जोशी की केंद्र में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

बड़ी सादड़ी क्षेत्र की लंबे समय से चल रही रेल मार्ग की मांग का भी 2014 से अब तक के कार्यकाल में निस्तारण हुआ है। और ऐसे कहीं महत्वपूर्ण बिंदु है जिसे भाजपा खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है।

जिले में भाजपा संगठन की हालात बन सकती है चुनौती
भाजपा भले ही चित्तौड़गढ़ लोक सभा सीट को अपनी सुरक्षित सीट मान रही है लेकिन भाजपा के संगठन की अंदरूनी स्थिति भाजपा के लिए चिंताजनक हालात पैदा कर सकती है।

चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े चंद्रभान सिंह आक्या विधायक है जिसके चलते मुख्यालय पर भाजपा संगठन कमजोर स्थिति में है।

वही वल्लभनगर को साधने के लिए भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जनता सेना के टिकट पर चुनाव लड़े रणधीर सिंह भिंडर को भाजपा में शामिल करते हुए उनकी पार्टी का भाजपा में विलय किया गया है।

अंदर खाने इसका भी विरोध हो रहा है वहीं पूर्व में रावतभाटा क्षेत्र से नगर पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस पार्षदों को भाजपा की सदस्यता देने का विरोध भाजपा की अंदरूनी स्थिति को साफ कर रहा है।

जिस पर प्रदेश संगठन को अपना स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था ऐसे में पूरे प्रदेश और जिले की अंदरूनी स्थिति के साथ-साथ बड़े मत अंतर से चुनाव जीतना भाजपा का लक्ष्य है जिसे साधने का प्रयास शीर्ष नेतृत्व द्वारा भी लगातार किया जा रहा है।

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