उदयपुर के देवराज हत्याकांड में शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, स्कूल प्राचार्य और शिक्षक निलंबित
उदयपुर में छात्र देवराज की मौत के बाद शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है और क्लास टीचर को फिर से नियुक्त कर दिया है। 16 अगस्त को राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भटियानी चौहट्टा में लंच के दौरान एक सहपाठी ने उसे चाकू मार दिया था। इस घटना से इलाके में काफी अशांति फैल गई थी। जिसके कारण स्कूल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।
विभाग ने शुरू में स्कूल स्टाफ की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया। लेकिन जब लोगों में आक्रोश बढ़ा तो उन्होंने आखिरकार कार्रवाई की। प्रिंसिपल ईशा धर्मावत और क्लास टीचर राकेश कुमार जारोली को निलंबित कर दिया गया। यह फैसला घटना की जांच के बाद लिया गया।

कलेक्टर अरविंद पोसवाल ने शिक्षा विभाग को लिखे पत्र में स्कूल की लापरवाही को स्वीकार किया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद जांच की गई और प्रिंसिपल और शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
यह जानते हुए भी कि देवराज स्कूल के बाहर घायल हुआ है। स्टाफ के सदस्य उसे अस्पताल नहीं ले गए। इसके बजाय दो छात्रों ने उसे स्कूटर पर बिठाकर अस्पताल पहुंचाया। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने झूठा दावा किया कि एक शिक्षक देवराज को अस्पताल ले गया था।
देवराज की मौत पर समुदाय की प्रतिक्रिया बहुत तीखी थी। कई लोगों ने स्कूल स्टाफ से जवाबदेही की मांग की। शिक्षा विभाग द्वारा लापरवाही के आरोपों को शुरू में खारिज करने से लोगों का गुस्सा और भड़क गया। आखिरकार अधिकारियों और नागरिकों दोनों के दबाव के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई उसकी प्रणाली में विफलताओं को दूर करने तथा ऐसी घटनाओं में व्यक्तियों की भूमिका के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
जैसे-जैसे जांच जारी रहेगी। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए और उपाय किए जाएंगे। छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी क्षेत्रों के शैक्षिक अधिकारियों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।












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