होली पर राजस्थान का हरणी गांव 50 साल से दे रहा सबसे अनूठा संदेश

Bhilwara News, भीलवाड़ा। देशभर में रंगों का त्योहार होली धूमधाम से मनाया जा रहा है। लोग एक दूसरे खुशियों की गुलाल लगाकर होली खेल रहे हैं। धुलण्डी पर गुरुवार सुबह से ही हर तरफ उत्सव का माहौल बना हुआ है। इससे पहले बुधवार शाम को होलिका का दहन किया गया है।

भीलवाड़ा के गांव हरणी की पहल

भीलवाड़ा के गांव हरणी की पहल

Holi 2019 के मौके पर जानिए राजस्थान के एक गांव की अनूठी परम्परा के बारे में पिछले 50 साल से शिद्दत से निभाई जा रही है। दरअसल, होली पर होलिका का दहन करने के लिए लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है। अमूमन देशभर में होली दहन की यही परम्परा है, मगर राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का हरणी गांव (Harni Village Holi) लीक से हटकर कर रहा है।

होलिका का दहन की बजाय मूर्ति पूजा

होलिका का दहन की बजाय मूर्ति पूजा

यहां पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए होलिका दहन नहीं किया जाता ताकि लकड़ियों का प्रयोग ना करना पड़े। होलिका दहन की बजाय यहां पर होलिका की मूर्ति की पूजा की जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि यहां होली नहीं मनाई जाती, बल्कि उसी उत्साह, उमंग तथा श्रद्धापूर्वक होली पर्व मनाया जाता है। फर्क इतना होता है कि यहां पेड बचाने के लिए होली पर लकड़ियां नहीं जलाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए यहां केवल चांदी से निर्मित होलिका की पूजा की जाती है।

सामूहिक रूप से नृत्य करते हुए आते हैं होली चौक

सामूहिक रूप से नृत्य करते हुए आते हैं होली चौक

ग्रामीण शंकर लाल जाट ने बताया कि होली के दिन चारभुजा मंदिर में एकत्र होकर पूरा गांव होली चौक पहुंचता है। चौक में गांव के पंच-पटेल पूजा सम्पन्न कराते हैं। हर साल पर्यावरण संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराते हुए पिछले करीब 50 साल से भी अधिक समय से यह परम्परा निभाई जा रही है। इससे पहले सभी ग्रामीण चारभुजानाथ के मंदिर परिसर में एकत्र होकर सामूहिक रूप से नृत्य करते हुए ढोल बाजे के साथ सभी होली चैक पहुंचते हैं। इसके बाद बुजुर्गों के सान्निध्य में चांदी से निर्मित होली की विधि विधानपूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। दूसरे दिन धुलंडी के दिन रंग-गुलाल की होली खेली जाती है।

इस बार भी बगैर पेड़ काटे होली का पर्व मनाया

इस बार भी बगैर पेड़ काटे होली का पर्व मनाया

ग्रामीण रामेश्वर लाल जाट ने बताया कि गांव के बड़े-बुजुर्गों ने बरसों पूर्व यह निर्णय पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने तथा होली दहन के दौरान होने वाले हुडदंग से बचने के लिए लिया था। उनके द्वारा लिया गया यह फैसला करीब 50 साल से चला आ रहा है।

इस फैसले का आज के युवा भी आदरपूर्वक पालन करके पर्यावरण संरक्षण में अपनी ओर से आहुतियां दे रहे हैं। होली 2019 के पर्व के दिन एक बार फिर से हरणी गांव के लोगों ने पेड़ों की रक्षा की इस परम्परा को निभाते हुए बगैर पेड़ काटे होली का पर्व मनाया।

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