राजस्थान: सरपंच का चुनाव लड़ना है तो पाकिस्तान से लाना पड़ेगा जाति प्रमाण पत्र, जानिए वजह
बाड़मेर। इन दिनों राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2020 परवान पर हैं। हर तरफ सरपंच चुनावों का प्रचार हो रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं भी चुनाव लड़ रही हैं, मगर राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में चुनाव लड़ने की इच्छुक कई महिलाओं के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई है। इन्हें चुनाव लड़ना है तो पहले पाकिस्तान से जाति प्रमाण पत्र लाना होगा।

आरक्षितों सीटों पर जाति प्रमाण पत्र जरूरी
दरअसल, ये पाकिस्तान की वो महिलाएं हैं, जो प्रताड़ना का शिकार होकर या शादी करके हिन्दुस्तान आ गईं। यहां आने के बाद इन्हें भारत की नागरिकता भी मिल गई। ये चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग भी करती हैं। पाक विस्थापित इन महिलाओं के सामने दिक्कत ये है कि सरपंच चुनाव 2020 में प्रत्याशी बनने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के नियमानुसार आरक्षित सीटों पर पिता के नाम जाति प्रमाण पत्र संलग्न करना जरूरी है।

करीब सौ गांवों में हैं एक लाख पाक विस्थापित
ऐसे में पाक विस्थापित इन महिलाओं को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद पाकिस्तान जाकर पिता की जाति का प्रमाण पत्र बनवाना पड़ेगा, क्योंकि इनका पीहर अब पाकिस्तान में है। ऐसी समस्या लता कंवर, मूमल और गीता देवी समेत कई महिलाओं के सामने आ रही है। बता दें कि राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर-जैसलमेर जिले में करीब एक लाख पाक विस्थापित लोग हैं। ये परिवार चौहटन, सेड़वा, रामसर, गडरारोड, शिव आदि समेत करीब सौ गांवों में बसे हुए हैं।

यहीं पर बनाकर दें जाति प्रमाण पत्र-धारा
पाक विस्थापित संघ के जिलाध्यक्ष नरपतसिंह धारा बताते हैं कि इतने कम समय में पाकिस्तान जाकर जाति प्रमाण पत्र कैसे बनाया जा सकता है। भारतीय नागरिकता मिलने के बाद सरकार हमारा जाति प्रमाण भी यही का बनाकर दें ताकि पंचायती राज चुनावों में अपनी भागीदारी निभा सकें। इस संंबंध में बाड़मेर अतिरिक्त निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र का आधार पितृत्व है। इसी के आधार पर आरक्षण तय होता है। महिलाओं को अपने मायके से यह प्रमाण पत्र लाना आवश्यक है।












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