वैलेंटाइन डे के मौके पर मिलिए उस शख्स से जिनका लेफ्ट की बजाय राइट साइड में धड़कता है दिल

बाड़मेर। वैलेंटाइन वीक में प्रेमी जोड़ों का दिल एक-दूसरे के लिए खूब धड़का है। दिल की बात जुबां तक आ गई। हर कोई मोहब्बत के इस खास लम्हे को यादगार बनाता दिखा। दिल से जुड़े वैलेंटाइन डे पर जानिए एक ऐसे 'दिलवाले' की कहानी जिनके सीने में दिल बांयी (लेफ्ट) की बजाय (दांयी) तरफ धड़कता है।

 बाड़मेर के रहने वाले हैं ओमप्रकाश दवे

बाड़मेर के रहने वाले हैं ओमप्रकाश दवे

अजब दिल की यह गजब कहानी राजस्थान के बाड़मेर शहर के कल्याणपुरा निवासी ओमप्रकाश दवे की है। दवे के दिल का मामला चिकित्सा विज्ञान के दुलर्भ मामलों में से एक है। 58 साल पहले जब इस बात का पता चिकित्सकों को चला था तो वे भी एक बारगी तो हैरान रह गए थे। वैलेंटाइन डे के मौके पर मीडिया से बातचीत में ओमप्रकाश दवे ने अपने दिल से जुड़ी कई रोचक बातें शेयर की।

 10 की साल उम्र में पता चला...दिल किधर है

10 की साल उम्र में पता चला...दिल किधर है

ओमप्रकाश बताते हैं कि वर्ष 1962 में मैं दस साल का था। उस समय मुझे खांसी की समस्या थी। शुरुआत में वैद्य से दवा ली और देसी उपचार भी करवाया, मगर खांसी नहीं गई। दिनदिनों समस्या बढ़ती जाने पर चिकित्सक को दिखाने गया। चिकित्सक ने सीने में बांयी तरफ स्टेथोस्कॉप लगाया और हैरान रह गए, क्योंकि बांयी तरफ कोई धड़कन नहीं थी। उन्होंने स्टेथोस्कॉप तुरंत दांयी ओर लगाया, जहां उन्हें दिल धड़कता मिला। दस साल की उम्र में पहली बार पता चला कि मेरा दिल बांयी की बजाय दाहिनी तरफ है।

दिल की वजह से बच गई जान

दिल की वजह से बच गई जान

ओमप्रकाश दवे के अनुसार मेरे दिल का मामला आठ साल बाद 1970 में मेरी जिंदगी में फिर सुर्खियों में रहा। इस बार दिल के कारण जान बची थी। हुआ यूं था कि उस समय 18 वर्षीय ओमप्रकाश बाड़मेर शहर में सड़क पार कर रहे थे। तब एक मिनी ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसे में ओमप्रकाश गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों हाथ फैक्चर हो गए थे। बांयी तरफ की पसलियां भी टूट गई थीं। तब दिल की वजह से जान बची थी।

 चिकित्सक फिर हुए हैरान

चिकित्सक फिर हुए हैरान

सड़क हादसा होने पर ओमप्रकाश को बाड़मेर के राजकीय अस्पताल में लाया गया। शरीर के बांए हिस्से में काफी फैक्चर हुआ था। चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल ओमप्रकाश की हृदय गति जांचनी चाही तो बांयी तरफ दिल ही नहीं पाकर वे भी हैरान रह गए। फिर ओमप्रकाश के परिजनों ने उन्हें बताया कि इनका दिल बांयी की बजाय दांयी तरफ है। ऐसे लोग भी सामान्य जिंदगी जी सकते हैं।

 दिल की वजह से खासी शिकायत

दिल की वजह से खासी शिकायत

ओमप्रकाश बताते हैं कि दिल दांयी तरफ हो या बांयी। क्या फर्क पड़ता है। इंसान को दिल से अच्छा होना चाहिए। हां, यह बात जरूर है कि मुझे बचपन से खांसी की जो शिकायत थी वो आज तक ठीक नहीं हो पाई। इसकी वजह चिकित्सक दिल का इधर से उधर होना बताते हैं।

 क्या कहते हैं कि हार्ट स्पेशलिस्ट

क्या कहते हैं कि हार्ट स्पेशलिस्ट

बाड़मेर के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अजीत कुमार बताते हैं कि ओमप्रकाश दवे का मामला दुर्लभतम श्रेणी का है। चिकित्सा विज्ञान का मोटा अनुमान है कि दुनिया की पूरी आबादी में सिर्फ 0.01 प्रतिशत में ही ऐसे मामले देखने को मिलते हैं। जिनमें इंसान के सीने में दिल बाएं की बजाय दाहिनी तरफ हो। ऐसे मामले में जन्मजात के ही होते हैं।

 जानिए कौन हैं ओमप्रकाश दवे

जानिए कौन हैं ओमप्रकाश दवे

बाड़मेर के कल्याणपुरा में रहने वाले ओमप्रकाश दवे शहर के वांकला माता मंदिर के पुजारी हैं। लोग इन्हें महाराज के नाम से भी जानते हैं। ये बाड़मेर में ज्योतिष, कर्म कांड, और विवाह सम्पन्न करवाने का कार्य करते हैं। ओमप्रकाश के मुताबिक हार्ट विपरित दिशा में होने के कारण बचपन से खांसी और कफ की शिकायत है।

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