Priyanka Chaudhary : चंद्रयान-2 की टीम का हिस्सा रही राजस्थान की यह बेटी, ISRO को भी इस पर गर्व

बांसवाड़ा। चंद्रयान-2 के जरिए हिन्दुस्तान चांद पर उस जगह जाना चाह रहा था, जहां आज तक कोई देश नहीं जा पाया। यह बात दीगर है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर इतिहास रचने से महज 69 सेकंड और 2.1 किलोमीटर पहले ही चंद्रयान-2 लैंडर विक्रम से इसरो का सम्पर्क टूट गया। भारत की स्पेस एजेंसी इसरो के वैज्ञानिकों के इस अभूतपूर्व प्रयास को दुनियाभर में सराहा जा रहा है। इसरो की इस सफलता में देशभर के वैज्ञानिकों के साथ-साथ राजस्थान की बेटी प्रियंका चौधरी का योगदान भी अहम है। ​प्रियंका चौधरी राजस्थान के बांसवाड़ा की रहने वाली है।

महिला वैज्ञानिकों की टीम का हिस्सा

महिला वैज्ञानिकों की टीम का हिस्सा

22 जुलाई 2019 आंध्रप्रदेश के श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-2 की लौंचिंग से लेकर लेकर 6-7 सितंबर की रात 1:53 बजे चांद की सतह पर लैंडिंग तक में मेहनत करने वाली इसरो की महिला वैज्ञानिकों की टीम में प्रियंका चौधरी भी शामिल रही है।

हम सबके लिए गर्व की बात-राजेश चौधरी

हम सबके लिए गर्व की बात-राजेश चौधरी

प्रियंका चौधरी के पिता डॉ. राजेश चौधरी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी भी चंद्रयान-2 मिशन का हिस्सा रही है। वह चंद्रयान-2 की लौंचिंग से लेकर लैंडिंग तक की टीम शामिल रही है। इसके अलावा भी अन्य कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। देश के सबसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट से बांसवाड़ा की बेटी का जुड़ना हम सबके लिए गर्व की बात है।

2017 में ज्वाइन किया इसरो

2017 में ज्वाइन किया इसरो

प्रियंका चौधरी ने भी मीडिया से बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में ऐरो स्पेस से बीटेक पूरा करने के बाद पहली ही बार में परीक्षा पास कर इसरो ज्वाइन किया। इसके बाद वह चंद्रयान-2 मिशन का हिस्सा बनने का अवसर मिला, जो उनकी जिंदगी का सबसे यादगार पल है। इसरो में साइंसटिस्ट ‘सी' के पद पर कार्यरत प्रियंका बताती हैं कि चंद्रयान-2 मिशन को लेकर सभी ने कड़ी मेहनत की। वे खुद ऑफिस से घर आने के बाद 4 से 6 घण्टे पढ़ाई करती रही हैं। सामान्य दिनों की अपेक्षा कई घण्टे ज्यादा ऑफिस में काम किया।

सिर्फ तीन बार आ पाई घर

सिर्फ तीन बार आ पाई घर

बता दें कि प्रियंका चौधरी के पिता डॉ. राजेश कुमार चौधरी बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में नियुक्त हैं। मां नीतू चौधरी व पिता राजेश चौधरी ने बेटी को पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर दिया। मीडिया से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि पिछले कई सालों से घर से दूर है। इसरो में जॉब लगने के बाद से तो वह सिर्फ 3 बार ही घर आ पाई है। वहीं मिशन चंद्रयान के दौरान तो कई बार ऐसा भी हुआ कि अपने माता-पिता से फोन पर बात भी नहीं कर पाई।

वर्ष 2011 की मेरिट में पांचवां स्थान

वर्ष 2011 की मेरिट में पांचवां स्थान

प्रियंका बचपन से ही होनहार रही है। वर्ष 2011 में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की परीक्षा में प्रियंका ने स्टेट मेरिट में पांचवा स्थान प्राप्त किया था। वर्ष 2013 में 12वीं में भी अच्छे प्रतिशत प्राप्त किए थे। और उसी वर्ष ऐरो स्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक के लिए सिलेक्शन हो गया था। प्रियंका ने त्रिवेंद्रम केरला से बीटेक किया।

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