Bagidora bypolls: राजस्थान की बागीदौरा सीट पर क्यों हो रहे उपचुनाव? जानिए सियासी समीकरण
Bagidora Election Banswara Rajasthan: देश में लोकसभा चुनाव 2024 की रणभेरी बजने के साथ ही राजस्थान की एक सीट बागीदौरा पर उपचुनाव भी करवाए जा रहे हैं।
बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा सीट उपचुनाव 2024 में 26 अप्रैल को मतदान होगा। मतगणना 4 जून की जाएगी। इस सीट पर भी चुनाव कार्यक्रम लोकसभा चुनाव के साथ-साथ चलेगा।

बागीदौरा सीट बांगड़ में कांग्रेस के दिग्गज नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय के विधायकी छोड़ने की वजह से खाली हुई है। बागीदौरा से विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए। ये साल 2008 से लगातार कांग्रेस विधायक थे।
बागीदौरा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही यहां पर पार्टी प्रत्याशी भी मैदान में उतारे जाने लगे हैं। आदिवासी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही भारत आदिवासी पार्टी (बाप) ने जयकृष्ण पटेल को टिकट दिया है।
जयकृष्ण पटेल वो नेता हैं, जिन्होंने बाप की ओर से राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 भी लड़ा था। विधानसभा चुनाव में जयकृष्ण पटेल को 60 हजार 387 वोट मत प्राप्त हुए थे। हालांकि ये भाजपा से भी ज्यादा वोट पाने में सफल रहे थे। महेंद्र जीत सिंह मालवीय विधायक बने थे। भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी।
अब बागीदौरा सीट के उपचुनाव में सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस के विधायक महेंद्रसिंह जीत मालवीय भाजपा में चले गए हैं। अब मालवीय के सामने अपनी पार्टी को तीसरे स्थान से पहले स्थान पर लाने की चुनौती है।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बागीदौरा सीट से कृष्णा कटारा को टिकट दिया था, जिन्होंने महज 20 फीसदी वोट हासिल किए थे। वहीं, सबसे ज्यादा 46 प्रतिशत वोट कांग्रेस के महेंद्र जीत सिंह मालवीय को मिले थे जबकि बाप उम्मीदवार जयकृष्ण पटेल को 27 फीसदी वोट हासिल हुए।
अब दिग्गज नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय के भाजपा में चले जाने से उम्मीद की जा रही है कि इसका सीधा फायदा बागीदौरा सीट उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को मिलेगा। राजस्थान की राजनीति के जानकार यह भी कह रहे हैं कि बागीदौरा में त्रिकोणीय मुकाबला देख जा सकता है।
खबर है कि इस बार भी बागीदौरा से भाजपा पूर्व प्रत्याशी कृष्णा कटारा को टिकट दे सकते हैं। कटारा जीत दर्ज करते हैं तो इतिहास बन जाएगा, क्योंकि यहां पर भाजपा कभी जीत नहीं सकी है। वहीं, कांग्रेस के लिए अपना यह गढ़ बचाना बड़ी चुनौती है, क्योंकि क्षेत्र के कई प्रधान, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, ब्लॉक अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए हैं।












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