Rahul Gandhi News: राजस्थान में राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट में परिवाद पेश,जानिए क्या है वजह
Rajasthan News: लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। चुनावों से पहले अब पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है।
राजस्थान,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई प्रदेशों में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के भाजपा में जाने से कमजोर हो रही पार्टी को नेता सम्भाल नहीं पा रहे है।
उधर दूसरी ओर राजस्थान के जयपुर में राहुल गांधी के खिलाफ वकील ने कोर्ट परिवाद दाखिल कर धर्म और जाति पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर परिवाद में कोर्ट ने परिवादी को अपने आरोप के समर्थन में 30 मार्च तक साक्ष्य पेश करने को कहा है.

जयपुर के महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-11, महानगर द्वितीय मेंं अधिवक्ता विजय कलंदर के पीएम नरेंद्र मोदी पर जातिगत टिप्पणी करने को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ परिवाद पेश किया है।
परिवाद में कहा गया कि उसने गत 9 फरवरी को अखबार में पढ़ा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ों न्याय यात्रा छत्तीसगढ़ पहुंची थी।
इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी जन्म से ओबीसी वर्ग के नहीं है, बल्कि गुजरात की भाजपा सरकार ने मोदी को ओबीसी बनाया है और वे पिछड़ों के हक और हिस्सेदारी के साथ न्याय नहीं कर सकते।
परिवाद में कहा गया कि भाजपा ने जब राहुल गांधी के इस बयान को झूठा बताया तो उन्होंने कहा कि मेरे सच पर मुहर लगाने के लिए धन्यवाद।
राहुल गांधी का सार्वजनिक तौर पर दिया ऐसा बयान भारतीय नागरिकों के विभिन्न वर्गों और समुदाय के प्रति अपराध करने के लिए उकसाने के लिए दिया गया है। यह बयान देश में अशांति पैदा करने वाला व देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के साथ ही देश की अखंडता के खिलाफ भी है।
परिवाद में यह भी कहा गया कि सार्वजनिक तौर पर राहुल गांधी खुद को कश्मीरी कौल पंडित बताते हैं, जबकि उनके दादाजी फिरोज गांधी गैर हिन्दू परिवार के थे।
अदालत पूर्व में कई फैसलों में कह चुकी है कि पिता की जाति ही उसे बच्चे की जाति होगी. जाति जन्म से होती है और उसे बदला नहीं जा सकता. ऐसे में उन्होंने खुद की जाति छिपाकर बयान दिया है।
जिससे परिवादी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, परिवादी ने मामले में शास्त्री नगर थाना पुलिस को शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसलिए मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने परिवादी को साक्ष्य पेश करने को कहा है।












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