अभिनव चौधरी शहीद : MIG-21 को क्यों कहते हैं IAF का उड़ता ताबूत, जानिए बार-बार क्रैश होने की असली वजह?
श्रीगंगानगर, 21 मई। भारतीय वायुसेना के सबसे तेज, खतरनाक और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शामिल मिग-21 ने बीती रात राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले स्थित सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ान भरी, मगर एक घंटे के बाद ही पंजाब के मोगा जिले के लंगियाना खुर्द गांव के पास मिग 21 क्रैश हो गया। हादसे में उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी पायलट अभिनव चौधरी शहीद हो गए। शुक्रवार सुबह उनका शव बरामद किया गया।
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वायुसेना की रीढ़ भी कहते हैं मिग 21 को
मेरठ के अभिनव चौधरी की शहादत के साथ ही एक बार फिर से MIG 21 की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। IAF में मिग 21 सबसे अधिक क्रैश होने वाला लड़ाकू विमान है। यही वजह है कि किसी जमाने में भारतीय वायुसेना की रीढ़ कहे जाने वाले मिग 21 को उड़ता हुआ ताबूत भी कहा जाता है। मतलब भारतीय वायुसेना में मिग 21 क्रैश होने से बड़ी संख्या में पायलट जान गंवा चुके हैं।

करीब 200 जवान गंवा चुके जान
आखिर मिग 21 से इतने अधिक हादसे क्यों होते हैं। इसकी कई वजह हैं। मीडिया से बातचीत में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि MIG-21 विमानों के क्रैश होने से 200 से ज्यादा जवान जान गंवा चुके हैं। भारतीय वायुसेना मिग 21 विमानों को धीरे-धीरे हटाने की कवायद शुरू कर चुकी है, लेकिन अभी तक इन्हें पूरी तरह से हटाया नहीं गया है।

मिग 21 के क्रैश होने की वजह नम्बर 1
लड़ाकू विमान मिग 21 काफी तेज गति से उड़ता है। इन विमानों के कुछ मॉडल बहुत तेजी से लैंड करते हैं। कॉकपिट की खिड़कियानों की डिजाइन ऐसी है कि पायलट को रनवे ठीक से दिख नहीं पाता है।

मिग 21 के क्रैश होने की वजह नम्बर 2
मिग 21 के क्रैश होने की दूसरी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसके इंजन में फ्लेम आउट यानी अचानक आग पकड़ना भी आम है और इस कारण ही हादसे होते हैं।

मिग 21 के क्रैश होने की वजह नम्बर 3
मिग 21 के क्रैश होने की एक वजह एक्सपर्ट्स ये भी मानते हैं कि भारतीय वायुसेना में लंबे समय तक किसी और फाइटर जेट का न शामिल होना भी है। लंबे समय तक वायुसेना में कोई नया फाइटर जेट शामिल नहीं किए जाने से पूरा भार मिग-21 पर ही रहा।

अन्य फाइटर जेट्स को शामिल करने में देरी हुई
टीवी9 की खबर के मुताबिक भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त पूर्व अधिकारी एयर वाइस मार्शल सुनील नानोदकर कहते हैं कि क्या इसके आलावा कोई और विकल्प था? अपने आसमान की रक्षा के लिए आपके पास निश्चित संख्या में लड़ाकू विमान होने चाहिए, लेकिन इतने सालों में अन्य फाइटर जेट्स को वायुसेना में शामिल करने में काफी देरी हुई।












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