छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में निर्णायक होंगे युवा मतदाता

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में राजनांदगांव-कवर्धा जिले को मिलाकर कुल 14 लाख 11 हजार 51 मतदाता थे। इस बार यह संख्या 15 लाख 80 हजार 456 हो गई है। यानी पांच साल में मतदाताओं की संख्या 1 लाख 69 हजार 405 बढ़ गई है।
पिछले चुनाव में जीत का अंतर 1 लाख 19 हजार 71 था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोशिश करेगी कि इस अंतर में नए मतदाताओं का आंकड़ा भी जुड़ जाए, जबकि कांग्रेस चाहेगी कि पिछले चुनाव में हार के अंतर को ध्यान में रखते हुए नए मतदाताओं के जरिए इस बार जीत का परचम लहराया जाए। दोनों दल नए युवा मतदाताओं को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
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वर्ष 2009 का चुनाव जीतने वाले भाजपा के मधुसूदन यादव को 4 लाख 37 हजार 721 वोट मिले थे। उन्होंने कुल मतदान का 52.70 फीसदी वोट बटोरा था, जबकि कांग्रेस के देवव्रत सिंह को 3 लाख 18 हजार 647 मत मिले थे। यह कुल मतदान का 38.36 प्रतिशत था। तीसरे स्थान पर रहने वाले डीआर यादव को 19 हजार 984 वोट मिले थे। यह कुल मतदान का 2.41 प्रतिशत था।
पांच साल बाद भी लोकसभा चुनाव में मुद्दा वही रहेगा। रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण और प्रमुख ट्रेनों के ठहराव का मुद्दा इस बार भी चुनाव के दौरान उठेगा। बंद हो चुकी बीएनसी मिल के विकल्प के रूप में नए उद्योग की स्थापना और रोजगार के दूसरे साधनों पर राजनीतिक दलों के बीच बहस छिड़ सकती है। केंद्र की बड़ी परियोजनाओं के अलावा रेल सुविधाओं में विस्तार, नई रेल लाइन जैसे पुराने मुद्दे चुनाव में एक बार फिर उठाए जा सकते हैं।
ऐसा नहीं कि लोकसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों को लेकर ही लड़ा जाएगा। इस बार ऐसे मुद्दों पर व्यक्ति विशेष का प्रभाव भी उतना ही रह सकता है। भाजपा के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की हवा बनी हुई है। कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी युवाओं को बांधने में लगे हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी प्रभावी भूमिका निभाने के लिए पूरी कसरत कर रहे हैं। इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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