कांग्रेस की जनअधिकार महारैली कल, 70 से अधिक सामाजिक संगठन होंगे शामिल
आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस संगठन की तरफ से आयोजित जनाधिकार महारैली के दौरान राजभवन और भाजपा के खिलाफ हुंकार भरी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में आरक्षण के मामले पर सियासत जारी है। कल 3 जनवरी को कांग्रेस रायपुर के साइंस कॉलेज में कांग्रेस की जनअधिकार महारैली करने जा रही है। इस रैली में एआईसीसी के महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी कुमारी सेलजा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम, प्रभारी सचिव चंदन यादव, मंत्री, कांग्रेस के विधायक शामिल होंगे। यह भी जानना जरुरी है कि कांग्रेस की महारैली की सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वजह से विवेकानंद आश्रम से एनआईटी, टाटीबंध से एम्स और डीडीयू नगर के गोल चौक और साइंस कॉलेज की तरफ आम यातायात भी बाधित रहेगा।

गौरतलब है कि विधानसभा से पास होने के बाद भी आरक्षण संशोधन विधेयक राजभवन में जाकर रुक गया है। राज्यपाल अनुसुईया उईके ने विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस संगठन का यह मानना है कि राजभवन भाजपा के इशारे पर आरक्षण संशोधन विधेयक को लागू होने से रोक रहा है।
आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस संगठन की तरफ से आयोजित जनाधिकार महारैली के दौरान राजभवन और भाजपा के खिलाफ हुंकार भरी जाएगी। कांग्रेस संगठन का दावा है कि इस रैली में 70 से अधिक समाजों के लोग रैली में शामिल होंगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने बताया कि कांग्रेस के द्वारा रैली की तैयारियां पूरी की जा चुकी है। प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों से लोग रैली में शामिल होने आ रहे हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ भर से 1 लाख से अधिक युवा शामिल होंगे।मरकाम ने कहा कि 3 जनवरी को प्रदेश के सभी समाज के वंचित लोग अपने अधिकारों की आवाज को बुलंद करने एकत्रित होंगे। कांग्रेस सरकार को सर्व समाज को आरक्षण देने का राजनैतिक रूप से श्रेय नहीं मिले इसिलये भाजपा राजभवन में आरक्षण बिल पर हस्ताक्षर नहीं होने दे रही है। रैली के बाद कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाकर बिल पर हस्ताक्षर करने ज्ञापन भी सौपेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा और संघ के राष्ट्रीय नेता तथा राज्य के नेता एक राय होकर सर्व समाज के आरक्षण को राजभवन में रोकवा कर रखे हुये है। आरक्षण बढ़ाने संबंधी विधेयक जब कर्नाटक विधानसभा में पारित होता है तब वहां पर राज्यपाल हस्ताक्षर करते है जब वैसा ही आरक्षण विधेयक छत्तीसगढ़ विधानसभा और झारखंड विधानसभा में पारित किया जाता है तो राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं करती है। कर्नाटक में भाजपा सरकार ने विधेयक बनाया श्रेय आपकी पार्टी (भाजपा) को मिलेगा तो वहां ठीक छत्तीसगढ़, झारखंड में कांग्रेस की सरकार है ,वहां विरोध कर रहे हैं।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि भाजपा आरक्षण विधेयक पर अपना मत स्पष्ट करें वह आरक्षण संशोधन विधेयक के किस पहलू से असहमत और क्यों राजभवन में आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं होने दे रही है? भाजपा को आदिवासी समाज को दिये गये 32 प्रतिशत आरक्षण पर आपत्ति है अथवा वह अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये किये गये 27 प्रतिशत आरक्षण से असहमत है? भाजपा को इस बात का विरोध है कि नये आरक्षण विधेयक में अनुसूचित जाति के लिये किये गये 13 प्रतिशत आरक्षण के लिये विरोध कर रही है? या गरीब सवर्णों के 4 प्रतिशत आरक्षण के विरोध में भाजपा है। भाजपा की नीयत आरक्षण पर शुरू से संदिग्ध है।
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