मंत्रालय जाने निकले थे नवा रायपुर 200 किसान, पुलिस ने बीच रास्ते में रोका
पुलिस ने रोका
रायपुर, 11 मार्च। छत्तीसगढ़ में किसानो का प्रदर्शन अब भी जारी है। नवा रायपुर के किसान का बीते 68 दिनों से नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के दफ्तर के बाहर धरना जारी हैं। शुक्रवार को करीब 2 हजार से अधिक किसानों ने मंत्रालय तक विरोध स्वरूप पैदल मार्च आयोजित किया । हालांकि किसानो को पुलिस ने थोड़ी ही दूर पर रोक लिया, लेकिन किसानों नहीं माने और पुलिस को अपनी शक्ति का इस्तेमाल करना पड़ा।

200 की तादाद में आंदोलन स्थल से लेकर मंत्रालय तक किया पैदल मार्च
छत्तीसगढ़ सरकार ने नवा रायपुर के किसानों की 8 मांगो में से 6 को मान लिया है,लेकिन किसान अब भी अपनी पूरी मांगों को मनवाने के लिए अड़े हुए हैं। दो महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे नवा रायपुर के किसानो ने शुक्रवार को करीब 200 की तादाद में आंदोलन स्थल से लेकर मंत्रालय तक पैदल मार्च का कार्यक्रम रखा था। जिसे पुलिस बल ने बैरीकेड लगाकर बीच में ही रोक लिया। इस दौरान किसानों को पुलिस जवानो के बीच झड़प की स्थित भी निर्मित हुई। गर्म माहौल में पुलिस ने किसानों पर बल प्रयोग करते हुए हल्का लाठीचार्ज भी किया।
पैदल मार्च रोके जाने से नाराज किसानों ने बीच रास्ते पर ही बैठकर धरना शुरू कर दिया। किसानों के मार्च में महिलायें भी बड़ी संख्या में शामिल थीं,लिहाजा पुलिस को भी भीड़ को नियंत्रित करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार सुबह से ही आंदोलन स्थल पर नवा रायपुर के किसानों की भीड़ उमड़ने लगी थी। सरकार से मांग मान लेने की अपील संबंधी फार्म भरकर किसान मार्च पर निकल पड़े। इस प्रदर्शन के लिए तैयारी बीती रात से ही शुरू कर दी गई थी,जिसकी जानकारी प्रशासन को लग चुकी थी। रायपुर जिले के कलेक्टर सौरभ कुमार ने बीती रात ही नवा रायपुर स्थित मंत्रालय के आसपास करीब 100 मीटर की सीमा तक पहुंचने वाले सभी मार्गों पर धारा 144 लागू कर दी थी ।
सरकार ने मांग ली हैं किसानों की 8 में से 6 मांग
नवा रायपुर में आंदोलन कर रहे किसान असल में वह ग्रामीण हैं,जिनकी जमीन का अधिग्रहण करके छत्तीसगढ़ सरकार ने नवा रायपुर बसाया था। लम्बे आंदोलन के बाद भूपेश बघेल सरकार ने हाल ही में किसानों की 8 मांगों में से 6 मांग ली हैं,अब किसान चाहते है कि उनकी बची हुई 2 मांगो पर भी सरकार जल्द फैसला ले। राज्य सरकार ने किसानों को व्यापार के लिए दुकान, युवाओं को रोजगार और नवा रायपुर की जमीन का पट्टा देने बात मान ली हैं, लेकिन किसान चाहते है कि नवा रायपुर के सभी गांवों में जमीन खरीदी बिक्री की रोक भी हटाई जानी चाहिए।
27 गांव की जमीन लेकर विकसित किया गया था नवा रायपुर
नवा रायपुर प्रभावित किसान कल्याण संघ के मुताबिक 27 गांव की जमीन लेकर नवा रायपुर (नया रायपुर) इलाका विकसित किया गया था। किसान चाहते हैं कि किसानों को जमीन पर चार गुना मुआवजा दिया जाए, हर प्रभावित परिवार को 1200 वर्ग फीट की विकसित जमीन देने के साथ किसान परिवारों के एक बेरोजगार वयस्क को रोजगार दिया जाए। किसान नेता ने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भी एक बड़ा आंदोलन किया जा चुका है, जिसका समर्थन कांग्रेस ने किया था। 3 जनवरी से जारी है किसानों का धरना साल 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार बनने पर उन्हें पूरा करने का वादा किया था। लेकिन सत्ता पर काबिज होने के बाद कांग्रेस सरकार इसे भूल गई । अपनी मांगो को लेकर किसान 3 जनवरी 2022 से लगातार नवा रायपुर में धरना दे रहे हैं।












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