पंजाब: पार्टी विरोधी कार्य के बावजूद कांग्रेस क्यों नहीं कर रही कार्रवाई, किस बात का सता रहा डर ?
विधानसभा चुनाव के लिए हुए मतदान की गिनती 10 मार्च को होनी है। इससे पहले पंजाब के सियासी दल ख़ुद की जीत का दावा कर रहे हैं।
चंडीगढ़, 26 फरवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए हुए मतदान की गिनती 10 मार्च को होनी है। इससे पहले पंजाब के सियासी दल ख़ुद की जीत का दावा कर रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस भी पंजाब में दोबारा से सरकार बनाने का दावा कर रही है। वहीं कांग्रेस में गुटबाज़ी फिर से शुरू हो गई है, पार्टी के नेताओं के बीच ज़ुबानी जंग जारी है। मतदान होने के बाद भी पार्टी विरोधी कार्य करने पर कांग्रेस कार्रवाई क्यों नही कर रही है यह चर्चा का विषय बना हुआ है। आख़िर इसके पीछे की क्या वजह है, कांग्रेस को किस बात का डर सता रहा है ?

कांग्रेस में फिर शुरू हुई गुटबाज़ी
पंजाब कांग्रेस में कई ऐसे नता है जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी काम किया लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कुछ ऐसे नेता भी है जिन पर पार्टी की तरफ़ से कार्रवाई भी की गई। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के पास चुनाव के दौरान ही एक दर्जन से भी ज्यादा शिकायतें पहुंची थी। उन्होंने मतदान से कुछ दिन पहले अंगद सैनी, सतकार कौर, अमरीक सिंह ढिल्लों, केवल सिंह ढिल्लों, तरसेम डीसी, कपूरथला के प्रधान दलजीत राजू की सदस्यता खारिज कर दी थी। बस्सी पठानां से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई डॉक्टरर मनोहर सिंह, कपूरथला से राणा गुरजीत सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चुनाव के दौरान कई नेताओं ने छोड़ी पार्टी
पंजाब में विधानसभा चुनाव के दौरान अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू ने समेत कांग्रेस के दो दर्जनों से ज्यादा नेताओं ने पार्टी को अलविदा कह दिया। पंजाब में 6 से ज़्यादा सीटों पर कांग्रेस के नेता और उनके करीबी रिश्तेदारों ने अपनी ही पार्टी को चुनाव हराने का काम किया। इसके बावजूद कांग्रेस उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। पंजाब कांग्रेस में चुनाव परिणाम से पहले फिर से गुटबाज़ी शुरू हो गई है लेकिन कांग्रेस आलाकमान की तरफ़ से कोई ठोस क़दम नहीं उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस पूरे चुनाव के दौरान अपनी ही पार्टी के नेताओं की वजह से परेशानी में घिरी रही। खडूर साहिब से कांग्रेस के सांसद जसबीर डिंपा के भाई राजन गिल ने चुनाव के दौरान ही शिरोमणि अकाली दल की सदस्यता ले ली। 10 मार्च के बाद कोई बड़ा क़दम उठाने के संकेत भी वह (जसबीर डिंपा) दे रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं के बीच ज़ुबानी जंग जारी
कांग्रेस की सांसद परनीत कौर चुनाव के दौरान भाजपा गठबंधन के लिए वोट मांगती रही। अमृतसर के सांसद गुरजीत औजला ने भी कांग्रेस के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी शुरू कर दी है। इन सबके अलावा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के मीडिया सलाहकार ने भी कांग्रेस आलाकमान पर अनुशासनहीनता नहीं रोक पाने का आरोप भी लगाया था। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (गिद्दड़बाहा से प्रत्याशी) ने बठिंडा के प्रत्याशी मनप्रीत बादल के ख़िलाफ़ पार्टी हाईकमान को शिकायत की है। पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी ने चुनाव से पहले परनीत कौर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। लेकिन उन्होंने (परनीत कौर) नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। आपको बता दें कि हरीश चौधरी पंजाब प्रभारी होने के साथ ही आल इंडिया कांग्रेस के सचिव भी हैं। किसी भी पार्टी के सांसद को महासचिव संगठन ही नोटिस जारी कर सकता है।
कांग्रेस आलाकमान क्यों नहीं कर रही कार्रवाई ?
कांग्रेस आलाकमान परनीत कौर को पार्टी से इसलिए बर्खास्त नहीं कर पा रही है। अगर पार्टी ने उन्हें बर्खास्त किया तो परनीत कौर आजाद सांसद हो जाएंगी। कांग्रेस से बर्खास्त होने के बाद वह किसी भी दल में आराम से शामिल हो सकती हैं। वहीं अगर परनीत कौर ख़ुद कांग्रेस से इस्तीफ़ा देंगी तो उनकी सांसद की मान्यता ख़त्म हो जाएगी इसलिए वह पार्टी की तरफ़ कार्रवाई का ही इंतेज़ार कर रही हैं। कांग्रेस आलाकमान किसी पर भी कार्रवाई करने से पहले 10 मार्च को आने वाले चुनाव परिणामों का भी इंतजार कर रही है। इसके पीछे की वजह है कि चुनाव परिणाम में के बाद ही पता चलेगा कि किस प्रत्याशी जीत दर्ज कर पार्टी की सीटें बढ़ाई हैं। अगर कांग्रेस ने चुनाव परिणाम से पहले कोई क़दम उठाया तो पार्टी को नुकसान हो सकता है। क्योंकि उनके जीते हुए विधायक भी पार्टी के ख़िलाफ़ जा कर दूसरे दलों को समर्थन कर सकते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव का भी डर सता रहा है।
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