कांग्रेस में लंबा रह चुका है बगावत इतिहास, क्या है पार्टी की सियासी पकड़ मज़बूत करने का फॉर्मूला ?

कांग्रेस को पांच राज्यों में मिली करारी हार के बाद बीते तीन दिनों में जी- 23 की तीसरी बैठक हो चुकी है।

चंडीगढ़, 19 मार्च 2022। कांग्रेस को पांच राज्यों में मिली करारी हार के बाद बीते तीन दिनों में जी- 23 की तीसरी बैठक हो चुकी है। जी-23 के नेता लगातार कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। खुली जुबान से तो कोई भी नेता अपनी बात नहीं रख पा रहा है लेकिन दूसरे के कंधों पर बंदूक रख कर ज़रूर चला ज़रूर रहा है। कांग्रेस अब तक के अपने इतिहास में सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पांच राज्यों के हाल ही हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के नेता नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े कर रहे हैं।

कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल

कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल

कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर पहले से ही प्रश्न उठते रहे हैं। पार्टी के नेताओं के एक समूह, जिसे जी-23 कहा जाता है ने साल 2020 में सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में व्यापक स्तर पर बदलाव की बात कही थी। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद जी-23 के नेता फिर से एक्टिव होने के बाद पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गांधी परिवार को आंखें तो दिखाई ही रहे हैं साथ ही भारतीय जनता पार्टी का भी गांधी परिवार पर जुबानी हमला जारी है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने गांधी परिवार को सीधे चुनौती दी हो। इससे पहले भी कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने या तो हाथ का साथ छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई या भी कांग्रेस ने ही बड़े नेताओं को बाहर का दरवाजा दिखाया।

कांग्रेस से टूट कर बन चुके हैं छोटे-बड़े 70 दल

कांग्रेस से टूट कर बन चुके हैं छोटे-बड़े 70 दल

कांग्रेस में बगावत का लंबा इतिहास रह चुका है। अब तक कांग्रेस से टूट कर छोटे-बड़े 70 दल बन चुके हैं। पार्टी के कई दिग्गज कांग्रेस से नाखुश होकर अपनी पार्टी बना चुके हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम नाम ममता बनर्जी का है। उन्होंने साल 1998 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। इसके बाद 1999 में कांग्रेस से अलग होने के बाद शरद पवार, तारिक़ अनवर और पी॰ ए॰ संगमा पीए संगमा ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की स्थापना की थी। वहीं साल 2013 में संगमा ने अपनी ही राजनीतिक पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी की स्थापना की थी। सबसा ताज़ा उदाहरण पंजाब में कांग्रेस से अलग होकर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2 नवंबर 2021 में अपनी सियासी पार्टी बना ली।

पार्टी को मज़बूत करने के लिए कांग्रेस का फॉर्मूला

पार्टी को मज़बूत करने के लिए कांग्रेस का फॉर्मूला

कांग्रेस में मुकम्मल बदलाव को लेकर जी-23 नेताओं की विस्तृत और ठोस योजना क्या है, इसका कोई स्पष्ट खाका अभी तक सामने नहीं आया है। आखिर जी-23 उस एक नेता का नाम सामने क्यों नहीं रखता जिसमें कांग्रेस को नए सिरे से पुनर्जीवित कर सकने की क्षमता है। जी-23 में जो नेता हैं उनमें से अगर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को छोड़ दिया जाए तो कोई भी नेता मास लीडर नहीं है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अब डोर-टू-डोर सर्वे के आधार पर ही पार्टी में परिवर्तन करेगी। जनता के सुझाव के मुताबिक हर राज्य में कांग्रेस परिवर्तन करने पर विचार कर रही है। कांग्रेस को नए सिरे से खड़ा करने की जरूरत है क्योंकि पार्टी का मुकाबला भाजपा-जैसी बहुत ही ताकतवर राजनीतिक शक्ति से है।

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