Indo-Pak: 'दुनिया में ऐसा कहीं नहीं हुआ', AI से बॉर्डर सुरक्षित करेगा भारत, पाक की बढ़ी टेंशन- Video
India Pakistan Border: भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को अगले लेवल पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। सरकार एक ऐसे Smart Border Project पर काम कर रही है, जिसके बाद पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट की चर्चा अब पाकिस्तान में भी होने लगी है और वहां के कई एक्सपर्ट्स इसे लेकर चिंता जता रहे हैं।
आखिर क्या है Smart Border Project?
अब तक बॉर्डर सिक्योरिटी का बड़ा हिस्सा जवानों की गश्त, बाड़ और चौकियों पर निर्भर रहता था। लेकिन नया Smart Border System पूरी तरह टेक्नोलॉजी बेस्ड होगा। इसमें ड्रोन, रडार, AI (Artificial Intelligence), सेंसर, थर्मल कैमरे और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी बॉर्डर पर होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। सरकार का मकसद साफ है, पाकिस्तान और बांग्लादेश की तरफ से होने वाली घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियों और तस्करी को लगभग खत्म करना।

क्या बोला था अमित शाह ने?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने BSF के रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर के दौरान इस प्रोजेक्ट की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि पुरानी सुरक्षा व्यवस्था की जगह एक ऑटोमैटिक सेंसर ग्रिड लगाया जाएगा। इसमें ड्रोन डिटेक्शन रडार, थर्मल कैमरे, माइक्रो-UAV सिस्टम और कई आधुनिक उपकरण एक सेंट्रल कमांड सेंटर से जुड़े होंगे। सीधे शब्दों में कहें तो बॉर्डर पर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी रियल टाइम में कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी।
जहां जवानों के लिए मुश्किल थी निगरानी, वहां AI करेगा काम
भारत की कई सीमाएं ऐसे इलाकों से गुजरती हैं जहां हर समय निगरानी रखना आसान नहीं होता जैसे ब्रह्मपुत्र नदी का लगातार बदलता रास्ता, सुंदरबन के घने जंगल, कच्छ का दलदली इलाका और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्र। इन जगहों पर घुसपैठियों को पकड़ना हमेशा चुनौती रहा है।लेकिन नई AI टेक्नोलॉजी इन कठिन इलाकों में भी 24x7 निगरानी रखने में मदद करेगी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान के लिए आतंकियों को भारतीय सीमा में भेजना काफी मुश्किल हो जाएगा।
पाकिस्तान में क्यों होने लगी चर्चा?
एक पाकिस्तानी कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi से भारत के इस प्रोजेक्ट को लेकर सवाल पूछा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस Smart Border Project की लागत करीब ₹13,000 करोड़ यानी लगभग 1.3 अरब डॉलर बताई जा रही है। इस पर बयान देते हुए सेठी ने कहा- "यह बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें ज्यादातर मदद इजरायल से मिलेगी।" उन्होंने दावा किया कि इस डिजिटल फेंसिंग में इस्तेमाल होने वाले कई सिस्टम इजरायल से आ सकते हैं और भारत इस दिशा में काम शुरू कर चुका है।
"भारत जो कर रहा है, वैसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ"
नजम सेठी ने आगे कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद सीमा पर होने वाली हर गतिविधि की निगरानी करना है। सेठी के मुताबिक-
"भारत जो कर रहा है, वैसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ है।"हालांकि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से इजरायल की किसी विशेष भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन पाकिस्तान में इस प्रोजेक्ट को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
कितनी लंबी सीमा पर लगेगी डिजिटल फेंसिंग?
भारत की कुल स्थलीय सीमा लगभग 15,106.7 किलोमीटर लंबी है। यह सीमा पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, नेपाल, म्यांमार और भूटान से लगती है। सरकार की योजना लगभग 6,000 किलोमीटर संवेदनशील सीमा को Smart Surveillance Network से कवर करने की है। यानी उन इलाकों पर खास फोकस होगा जहां घुसपैठ, आतंकवाद और तस्करी का खतरा ज्यादा रहता है।
सिर्फ घुसपैठ नहीं, तस्करी पर भी लगेगी लगाम
इस सिस्टम का इस्तेमाल सिर्फ आतंकियों को रोकने के लिए नहीं होगा। इसकी मदद से मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की सप्लाई, पशु तस्करी, संगठित अपराध और नकली मुद्रा के नेटवर्क पर भी नजर रखी जाएगी। यानी बॉर्डर सिक्योरिटी और कानून व्यवस्था दोनों को इसका फायदा मिल सकता है।
एंटी-ड्रोन सिस्टम भी होगा गेम चेंजर
आजकल ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स भेजने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए Smart Border Project में Anti-Drone Technology भी शामिल होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक IG T-Shul Pulse Anti-Drone System जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ स्मार्ट फेंसिंग, सेंसर नेटवर्क, रडार, CCTV कैमरे और एक केंद्रीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर भी होगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह प्रोजेक्ट भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी को पूरी तरह बदल सकता है।
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