चुनावी साल में पंजाब में नया ज़िला और गांव का नाम बदलने की मांग ने पकड़ा तूल, जानिए क्या है मुद्दा ?
पंजाब सरकार की ओर से जिला गुरदासपुर की तहसील बटाला को एक अलग जिला घोषित करने के मुद्दे पर कैप्टन सरकार का विरोध ख़त्म भी नहीं हुआ था कि लहरागागा को नया ज़िला बनाने की मांग उठने लगी है
चंडीगढ़, सितंबर 14, 2021। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले नया ज़िला बनाने की मांग और गांवों के नाम बदलने की मांग पर सुरखियों में है। पंजाब सरकार की ओर से जिला गुरदासपुर की तहसील बटाला को एक अलग जिला घोषित करने के मुद्दे पर कैप्टन सरकार का विरोध ख़त्म भी नहीं हुआ था कि लहरागागा को नया ज़िला बनाने की मांग उठने लगी है। वहीं अब पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग की अध्यक्ष तेजिंदर कौर ने जाति आधारित गांवों के नाम को बदलने की मांग की है।

गांवों के नाम को बदलने की मांग
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग की अध्यक्ष तेजिंदर कौर ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उन गांवों, कस्बों और अन्य जगहों के नाम बदलने को कहा, जिनके जाति आधारित नाम थे। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, अनुसूचित जाति आयोग की अध्यक्ष तेजिंदर कौर ने कहा कि अनुसूचित जाति से जुड़े विभिन्न संगठनों द्वारा आयोग के संज्ञान में लाया गया है कि राज्य के अधिकांश गांवों, कस्बों, स्कूलों, मोहल्लों, और गलियों के नाम जाति आधारित हैं। मुख्य सचिव विनी महाजन से तेजिंदर कौर ने यह कहा कि 'हरिजन' और 'गिरिजन' शब्दों का आधिकारिक कामकाज में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से करें परहेज़- कौर
अनुसूचित जाति आयोग की अध्यक्ष तेजिंदर कौर ने मुख्य सचिव को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने को कहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज और राजस्व, ग्रामीण विकास और पंचायत, स्थानीय सरकार जैसे संबंधित विभागों में हरिजन और गिरिजन शब्दों के इस्तेमाल से परहेज करने के निर्देश जारी किए जाएं। स्कूल शिक्षा और रजिस्ट्रार सहकारी समितियों को गांवों/कस्बों, स्कूलों, मोहल्लों, बस्ती, गलियों, धर्मशालाओं और सोसाइटियों के नाम बदलने को लेकर जऱूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
अलग ज़िला बनाने की मांग
पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस नेत्री राजिंद्र कौर भट्ठल ने राज्य के मुख्यमंत्री के सामने पंजाब के लहरागागा को जिला घोषित करने की मांग की है। मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में भट्ठल ने कहा है कि पिछले विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ने लहरागागा को जिला बनाने का वायदा किया था, जोकि अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि लहरागागा विधानसभा हलका होने के साथ ही कई मामलों में अहम है। राजिंद्र कौर भट्ठल पत्र में लिखा कि लहरागागा हलका नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी की चरण छोह धरती है। इलाका हरियाणा के बॉर्डर के साथ होने की वजह से यहां के लोगों को आगे बढ़ने का मौक़ा कम मिलता है। इस इलाके का ज़यादेतर हिस्सा घग्गर नदी की जद मे है, जिसकी वजह से हर साल काफ़ी तबाही होती है। फसलों की बर्बादी की वजह से यहा के लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज़्यादातर लोगों को काम के लिए संगरूर जाना पड़ता है। कई लोग आर्थिक हालात की वजह से वहां नहीं जा पाते हैं। इसलिए इस इलाके को जिला घोषित किया जाना बेहद ज़रूरी है।
CM का अधिवक्ता संघ ने किया विरोध
ग़ौरतलब है कि इससे पहले बटाला को जिला बनाने के विरोध में गुरदासपुर के वकीलों ने व्यापार मंडल के सहयोग से शहर में रोष मार्च निकाला था। जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट राकेश शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने की इसकी अध्यक्षता की थी। इस दौरान नगर काउंसिल के प्रधान एडवोकेट बलजीत सिंह पाहड़ा ख़ास तौर से शामिल हुए। रोष मार्च जिला कचहरी से शुरू होकर शहर के कई अलग अलग हिस्सों से होकर गुजरा। इस दौरान सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी हुई और धरना प्रदर्शन भी किया गया। गुरदासपुर बार एसोसिएशन के प्रधान राकेश शर्मा ने कहा कि जिला ऐतिहासिक जिला गुरदासपुर के साथ कई बार धोखा हो चुका है। पठानकोट और बटाला इस जिले की महत्वपूर्ण तहसीलें हुआ करती थी। इनमें से पठानकोट को गुरदासपुर से तोड़कर अलग जिला बना दिया गया। अब तहसील बटाला को भी गुरदासपुर से अलग किया जा रहा है। अफसोस की बात है कि राजनीति की वजह से ऐतिहासिक जिले के वजूद को ख़त्म किया जा रहा है। अगर बटाला ज़िला बनता है तो इससे सिर्फ़ वकील भाईचारे का ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि हर वर्ग के लोगों को परेशानी होगी।
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