पंजाबी लोक गायिका गुरमीत बावा: पद्मभूषण लेते हुए बेटी ग्लोरी बोलीं- ‘काश! आज मां जिंदा होतीं...’
गुरदासपुर। पंजाबी लोक गायिका गुरमीत बावा का नाम संगीत सुनने वाली पुरानी पीढ़ी के लोग शायद ही भूलें। उन्होंने अपनी जिंदगी के 60 साल पंजाबी लोक गायकी को अर्पित कर दिए। उनका 45 सेकेंड लंबी हाक का रिकॉर्ड आज भी कायम है। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया है। गुरमीत की मझली बेटी ग्लोरी बावा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों से पद्मभूषण ग्रहण किया। ऐसे में ग्लोरी का गला भर आया...

बेटी ग्लोरी बोलीं- ‘काश! आज मां जिंदा होतीं...’
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों से पद्मभूषण लेती गुरमीत बावा की मझली बेटी ग्लोरी बावा की आंखों से सहसा ही आंसू बहने लगे। भावुक हुईं ग्लोरी बोलीं- 'काश! आज मां जिंदा होतीं...'। वहीं, परिवार के अन्य लोग भी उन्हें याद करने लगे। मां को पद्मविभूषण सम्मान मिलने पर ग्लोरी जब राजधानी दिल्ली से पंजाब लौटीं तो हर किसी की निगाह उनकी ओर थी।

पिछले साल 77 साल की उम्र में निधन हुआ
ग्लोरी ने कहती हैं कि, ''मां हमारे बीच अब नहीं हैं। 77 साल की उम्र में 21 नवंबर 2021 को उनका निधन हो गया था। उसके बाद सरकार की ओर से पद्मविभूषण सम्मान की घोषणा हुई, उस दिन मां के बिछुड़ जाने का दर्द ताजा हो गया था। मुझे पद्मभूषण लेते वक्त ऐसा लगा जैसे मां सामने आ गई हों। मन में यह टीस हमेशा रहेगी कि अगर ये सब उनके रहते मिला होता तो कितना अच्छा होता। वो पंजाब में संगीत जगत की कीर्ति स्तंभ थीं।'

गायकी इतनी पसंद कि बाकी सब छोड़ दिया
गुरमीत पंजाब में गुरदास पुर के गांव कोठे में जन्मी थीं। उनकी शादी किरपाल बावा से हुई थी, तभी से गुरमीत को भी लोग बावा पुकारने लगे। उन दोनों में पहली एक समानता तो यही थी कि, दोनों ही पेशे से टीचर थे और गायकी के लिए दोनों ने ही नौकरी छोड़ दी थी। ऐसा बताया जाता है कि, गुरमीत 15 साल की उम्र से ही गायन में रम गई थीं। अब उनकी बेटियां भी गायकी में हैं।












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