भारत के अमीर राज्यों में से एक था पंजाब फिर भी क़र्ज़ का बोझ, कैसे चरमराई अर्थव्यवस्था ?
पंजाब के क़र्ज़ को लेकर भी वादे किए। मौजूदा हालात में पंजाब के सिर पर 3 लाख करोड़ से ज़्यादा का क़र्ज़ है।
चंडीगढ़, 26 फरवरी 2022। पंजाब में हाल ही में मतदान ख़त्म हुआ है, 10 मार्च को मतदान के परिणाम भी आने वाले हैं। चुनाव प्रचार के दौरान सभी सियासी दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए कई चुनावी वादे किए। सभी सियासी दलों ने पंजाब की जनता के लिए मुफ़्त सुविधाओं के वादों झड़ी लगा दी, इसके साथ ही पंजाब के क़र्ज़ को लेकर भी वादे किए। मौजूदा हालात में पंजाब के सिर पर 3 लाख करोड़ से ज़्यादा का क़र्ज़ है। आपको बता दें कि पंजाब भारत के अमीर राज्यों में शुमार किया जाता था लेकिन अब राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। पंजाब में सभी सियासी दलों ने चुनावी वादे तो ख़ूब किए लेकिन पिछली किसी सरकार ने गिरती अर्थव्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया। पंजाब के मौजूदा हालात में सुधार करने की ज़रूरत है लेकिन किसी भी दल के पास इसे ठीक करने का ब्लू प्रिंट नहीं है।

पंजाब एक ज़माने बहुत ही खुशहाल प्रदेश था
पंजाब एक ज़माने बहुत ही खुशहाल प्रदेश था लेकिन आज पंजाब का ग्लैमर ढूंढने से भी नहीं मिल रहा है। पंजाब में बेरोज़गारी और नशा के मुद्दे आम हैं। देश के टॉप-3 अर्थव्यवस्था वाले प्रदेशों में रहने वाले पंजाब की स्थिति अब बद से बदतर हो चुकी है। एक वक्त था जब पंजाब की प्रति व्यक्ति आय पूरे हिंदुस्तान में तीसरे नंबर पर थी। 1993 में हिदुस्तान के सभी राज्यों के मुक़ाबले पंजाब के हर तीसरे व्यक्ति की औसतन आय सबसे अधिक हुआ करती थी। वहीं साल 2009-2010 में पंजाब अर्थव्यवस्था के मामले में 10वें स्थान पर खिसक गया था। इसके साथ साल 2021 में पंजाब की प्रति व्यक्ति आय 15 राज्यों में सबसे कम रह गई।

पंजाब ने किया कृषि का आधुनिकीकरण
1960 के दशक में पंजाब ने कृषि का आधुनिकीकरण किया। एक रिसर्च के मुताबिक पंजाब की कृषि में 1971 से 1986 तक औसतन 5.07 फ़ीसद इज़ाफ़ा दर्ज किया गया था। वहीं पूरे भारत में इसके विपरीत कृषि में 2.31 फ़िसदी इज़ाफ़ा हुआ था जो की पंजाब में दर्ज की गई वृद्धि के आधे से भी कम थी। वहीं एक रिसर्च के मुताबिक 1986-2005 तक पंजाब की कृषि में 3 फ़िसदी इज़ाफ़ा दर्ज किया गया था। इसके साथ ही पूरे भारत में 2.94 फ़ीसद से इज़ाफ़ा दर्ज किया गया था। इसके बाद से पंजाब के हालात बद से बदतर होते चले गए, साल 2006, 2014 और 2015 के दौरान उत्पादन सिर्फ़ 1.6 फ़ीसद बढ़ी वहीं भारत का औसतन इज़ाफ़ा 3.5 फ़िसद रहा। पंजाब की अर्थव्यवस्था लगातार क्यों गिरी ? इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह पंजाब में उद्योगों को राजनेताओं का अपने क़ब्ज़े में लेना है।

कई क्षेत्रों में सिर्फ स्थानीय नेताओं का वर्चस्व
पंजाब के कई क्षेत्रों में सिर्फ स्थानीय नेताओं का ही बोल बाला है, यही वजह रही कि पूरे क्षेत्रों की स्थिती बुरी होती चली गई । बिजनेस रैंकिंग के मुताबिक साल 2015 में पंजाब 16वें स्थान पर था वहीं 2017 में 20वें स्थान पर पहुंच गया। हालांकि वर्ष 2019 में 19वें स्थान पर पहुंचा लेकिन उसके बाद भी पंजाब की स्थिति में गिरावट जारी है। फिलहाल पंजाब की स्थिती ऐसी है कि जो भी सरकार सत्ता में आएगी वह सबसे पहले अपने चुनावी वादे को पूरा करने पर ध्यान देगी क्योंकि अगर ऐसा नहीं करेगी तो इसका सीधा असर 2024 के चुनाव पर पड़ेगा। पंजाब में आने वाली सरकार को चाहिए कि राज्य के कृषि और निजी क्षेत्रों में जल्द से जल्द सुधार लाने की प्लानिंग की जाए ताकि पंजाब को पतन के रास्ते से उत्थान की तरफ़ ले जाया जा सके।
ये भी पढ़ें: पंजाब: पार्टी विरोधी कार्य के बावजूद कांग्रेस क्यों नहीं कर रही कार्रवाई, किस बात का सता रहा डर ?












Click it and Unblock the Notifications