CM मान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से की मुलाकात, मिल मालिकों और आढ़तियों के लिए लेकर आए खुशखबरी
New Delhi: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से सोमवार को मुलाकात की। मुलाकात के बाद मान ने कहा कि पंजाब में धान खरीद एक त्यौहार की तरह होती है। उन्होंने बताया कि पंजाब की अर्थव्यवस्था इस खरीद सीजन पर निर्भर करती है और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सीजन बहुत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि मौजूदा खरीफ खरीद सीजन 2024-25 के दौरान पंजाब में 185 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की संभावना है और मिलिंग के बाद 125 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी का अनुमान है। राज्य में सिर्फ सात लाख मीट्रिक टन क्षमता के लिए ही स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध है, जिससे राइस मिल मालिकों के बीच बहुत असंतोष है। सीएम मान ने मंत्री प्रह्लाद जोशी से अपील की कि खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए 31 मार्च 2025 तक राज्य से कम से कम 20 प्रतिशत अनाज की उठान सुनिश्चित की जाए। इसके लिए ओएमएसएस/इथेनॉल के लिए निर्धारित/निर्यात/कल्याण योजनाओं और अन्य श्रेणियों के तहत चावल की उठान बढ़ाई जाए।

Transportation खर्च की अदायगी
मिल मालिकों के परिवहन खर्च और चावलों की डिलीवरी का मुद्दा उठाते हुए सीएम मान ने कहा कि मिलिंग केंद्र के स्टोरेज की वजह से एफसीआई (FCI)मिल मालिकों को अपने डिपो पर चावल पहुंचाने के लिए कहता है। कुछ चावल डिपो राज्य के बाहर भी होते हैं, इस कारण मिल मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ता है। इसे देखते हुए हमने अतिरिक्त परविहन खर्च की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से अपील की है कि मिल मालिकों की मांगों पर गहनता विचार किया जाए और उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही इसमें बैकवर्ड चार्ज और अन्य खर्चों की कटौती न हो। इसपर केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री मान को आश्वस्त किया कि मिल मालिकों को आने वाले अतिरिक्त परिवहन खर्च का केंद्र सरकार वहन करेगी।
सीएम मान ने आगे कहा कि जैसे स्थान की कमी के कारण पिछले मिलिंग सीजन को 31 मार्च से आगे बढ़ाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप गर्मी के मौसम के कारण अप्रैल से 24 जुलाई तक धान के सूखने/वजन घटने/रंग बदलने के कारण अधिक नुकसान हुआ था। खरीफ सीजन 2023-24 से पहले की तरह ड्राइएज को MSP के एक प्रतिशत तक बहाल किया जा सकता है और जहां एफसीआई को दिए गए सीएमआर/एफआर में नमी की मात्रा 14 प्रतिशत से कम हो, वहां 31 मार्च के बाद डिलीवरी के लिए मिलरों को मुआवजा प्रदान किया जा सके।
'आउट-टर्न अनुपात का अध्यन हो'
मुख्यमंत्री ने आउट-टर्न अनुपात का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आउट-टर्न अनुपात 67 प्रतिशत से कम है, जिसका पुनर्मूल्यांकन किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र से अपील करते हुए कहा कि आउट-टर्न अनुपात का अध्ययन करने के लिए केंद्रीय टीमों की नियुक्ति करें। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कम पानी की खपत वाली तकनीत को लाने की पंजाब सरकार की अनूठी पहल की सराहना की। उन्होंने ऐसी और तकनीकों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार को पूरी मदद और सहयोग देने का आश्वासन दिया।
साथ ही सीएम ने आढ़तियों को कमीशन भत्ता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों/2019-20 से आढ़तियों को दिए जा रहे कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इस दौरान आढ़तियों के खर्चे कई गुना बढ़ गए हैं।












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