Power Crisis in Punjab : बिजली संकट पर गरमाई सियासत, CM चन्नी ने समस्या के समाधान पर दिया ये जवाब
Power Crisis in Punjab: पंजाब विधानसभा के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक पार्टियां सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को घेरने का कोइ कसर नहीं छोड़ रही है।
चंडीगढ़, अक्टूबर 11, 2021। पंजाब विधानसभा के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक पार्टियां सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को घेरने का कोइ कसर नहीं छोड़ रही है। पंजाब में बिजली संकट की समस्या पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने चन्नी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह ''मानव निर्मित'' संकट है। सरकार की तरफ़ से अग्रिम योजना नहीं बनाना, तैयारियों कमी और घोर लापरवाही' का नतीजा है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि राज्य में बिजली संकट नहीं होने देंगे। केंद्र सरकार से कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पंजाब ही नहीं पूरा देश कोयले की कमी की वजह से बिजली संकट का सामना कर रहा है। कोयला मंत्री से बातचीत की गई है और इस बाबत चिट्ठी भी लिखा गया है। केंद्र सरकार से पंजाब को जल्द से जल्द पर्याप्त कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। सीएम चन्नी ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में बिजली संकट पैदा नहीं होने देगी।

बिजली उत्पादन में कमी
शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बिजली संकट के लिए चन्नी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार की लापरवाही की वजह से हुआ है। बिजली संकट पूरी तरह से मानव निर्मित है। ग़ौरतलब है कि सीएम चन्नी ने कहा है कि पंजाब में बिजली संकट की समस्या पैदा नहीं होने देंगे वही पीएसपीसीएल ने कहा है कि 13 अक्टूबर तक रोजाना तीन घंटे पंजाब में बिजली की कटौती की जाएगी। कोयले की कमी की वजह से पंजाब राज्य बिजली निगम लिमिटेड को बिजली उत्पादन में कमी लानी पड़ रही है और बिजली सप्लाई में कटौती करनी पड़ रही है।

सुखबीर बादल ने साधा निशाना
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि कोयला मंत्रालय ने जब यह साफ कर दिया की देश में कोयला आपूर्ति की कमी नहीं है। तो फिर क्यों पंजाब में कोयले की कमी की वजह से बिजली संकट की समस्या पैदा हुई है। बिजली संकट संपूर्ण प्रशासनिक विफलता का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पंजाब अधिक बिजली उत्पादन वाला राज्य था इसके बावजूद चन्नी सरकार ने पंजाब को बिजली संकट की समस्या में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली अकाली सरकार के दौरान बिजली प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल थी। बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावा शिअद सरकार ने हरित ऊर्जा पर भी ख़ास ध्यान दिया था। उन्होंने कहा कि जब कोयला मंत्रालय ने कहा है कि देश में कोयला आपूर्ती की कमी नहीं है तो फिर इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए पंजाब सरकार कोयले का आवश्यक भंडार क्यों नहीं रख रही है। इससे सरकार की नाकामी साफ़ झलक रही है।
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बिजली सप्लाई में कटौती
पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी की वजह से बिजली सप्लाई प्रभावित है। किसानों का कहना है कि उन्हें पहले ही आठ घंटे की बजाए 5 घंटे बिजली बहुत ही मुश्किल से मिल पा रही है। वहीं अब गांव के साथ शहर के भी उपभोक्ताओं को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है। पंजाब स्टेट पॉवर निगम लिमिटेड ने कहा कि कोयले की कमी की वजह से बिजली उत्पादन में कमी आई है। 13 अक्तूबर तक रोज़ाना 3 घंटे के लिए बिजली की कटौती की जाएगी। जानकारी के मुताबिक रोपड़ थर्मल प्लांट और लहरा मुहब्बत में भी 2 दिन का कोयला बचा हुआ है। वहीं तलवंडी साबो, राजपुरा और गोइंदवाल में कोयला ख़त्म की कगार पर है। वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि नियम के मुताबिक थर्मल प्लांट में करीब 1 महीना उपयोग करने लायक कोयला स्टॉक में रहना चाहिए।
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