इस राज्य में पशुओं में मिले मंकीपॉक्स जैसे लक्षण, सरकार ने गठित की जिला स्तरीय टीमें
चंडीगढ़। कोरोना महामारी और मंकीपॉक्स के प्रकोप के बीच देश में कई तरह की और बीमारियां भी फैलने लगी हैं। इनमें से एक जानलेवा बीमारी है- लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin)। यह बीमारी दूध देने वाले पशुओं को शिकार बना रही है। इस बीमारी से गुजरात में हजारों पशु संक्रमित हो चुके हैं और इसने अब पंजाब में भी दस्तक दे दी है। पंजाब में पालतू गाय (Cow) और भैंस (Buffalo) में लम्पी वायरस के लक्षण मिलने पर मेडिकल विभाग हरकत में आ गया है। राज्य सरकार ने पशुपालकों सतर्क रहने को कहा है। इसके अलावा इस बीमारी की रोकथाम के लिए जिला स्तरीय टीमें गठित कर दी गई हैं।

पंजाब के पशु पालन, मछली पालन और डेयरी विकास मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने पशुपालकों को इस बीमारी से संबंधित किसी भी अफवाह से बचने की सलाह दी है। भुल्लर ने बताया कि राज्य में दुधारू पशुओं में लम्पी स्किन नामक संक्रामक रोग से बचाव के लिए हर ज़िले में टीमें तैनात कर दी गई हैं, जो गांव-गांव जाकर प्रभावित पशुओं को बीमारी से बचाने के उपाय के लिए जानकारी देंगी। हम चाहते हैं कि, पशु पालक नजदीकी पशु संस्थाओं से संपर्क करें।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि, नॉर्थ रीजनल डिवीजन डायग्नौस्टिक लैब (एन.आर.डी.डी.एल.) जालंधर की टीम को समूह ज़िलों का दौरा करने की हिदायत दी गई है, जो आज 28 जुलाई से प्रभावित जिलों का दौरा कर रही है.उन्होंने बताया कि पशु पालन विभाग के समूह अधिकारियों और मुलाजिमों को पशु-पालकों की हर पक्ष से सहायता करने के लिए पाबंद किया गया है. इस लिए पशुपालक किसी घबराहट में न आएं और किसी भी तरह की अफ़वाहों से बचें. उन्होंने कहा कि किसान या पशु-पालक बेझिझक अपनी नजदीकी पशु संस्था से संपर्क कर सकते हैं।
मंत्री भुल्लर ने बताया कि यह बीमारी दक्षिणी राज्यों से आई है और बरसातों में और अधिक तेज़ी से फैलती है क्योंकि मच्छर-मक्खी आदि के काटने से इस बीमारी के आगे और बढऩे का खतरा बना रहता है. इसलिए पशुओं के आस-पास सफाई का ध्यान रखा जाए और बीमार पशुओं को दूसरों से अलग कर लिया जाए। वहीं, विभाग के डायरैक्टर डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि पशुपालकों को घबराने की ज़रूरत नहीं, बल्कि एहतियात बरतनी चाहिए। बीमारी के लक्षणों का जिक्र करते हुए डॉ. सुभाष ने बताया कि इस बीमारी से पशुओं को तेज बुखार चढ़ता है और उनकी चमड़ी पर छाले हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी किसान के पशुओं में ऐसे बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो तुरंत नजदीकी पशु संस्था के साथ संपर्क करें. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर किसान अपने सेहतमंद पशुओं को पीड़ित पशु से अलग कर लें।
बता दें कि मंकीपॉक्स में भी लगभग ऐसे ही लक्षण देखे जा रहे हैं, जिसमें तेज बुखार आता है और त्वचा पर लाल दाने या छाले हो जाते हैं। डॉ. सुभाष ने बताया कि मीडिया के एक हिस्से में जिला फाजिल्का में सैंकड़ों जानवरों की मौत की खबर बेबुनियाद है। उन्होंने बताया कि डिप्टी डायरैक्टर पशु पालक विभाग फाजिल्का की टीम द्वारा आज प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया गया है और अभी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई।












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