पंजाब: किसान आंदोलन में अन्ना हजारे की सक्रियता पर किसान नेता ने उठाए सवाल, कही ये बात
किसान आंदोलन को लेकर सियासत भी शुरू हो चुकी है। कई किसान संगठन अन्ना हज़ारे से किसान आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए मुलाक़ात कर रहे हैं तो कई संगठन भाकियू के बैनर तले किसान आंदोलन को अमलीजामा पहनाने की बात कह रहे हैं।
चंडीगढ़, सितंबर 15, 2021। किसान आंदोलन को लेकर अब सियासत भी शुरू हो चुकी है। कई किसान संगठन अन्ना हज़ारे से किसान आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए मुलाक़ात कर रहे हैं तो कई किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान आंदोलन को अमलीजामा पहनाने की बात कर रहे हैं। हाल ही में हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता नई सगठनों के साथ अन्ना हज़ारे सें मिलने पहुंचे थे। इसी बाबत वन इंडिया हिंदी ने किसान आंदोलन से पहले दिन से जुड़े किसान नेता निर्मल सिद्धू से बात की उन्होंने किसान आंदोलन के मुद्द पर बेबाकी से जवाब दिया।

अन्ना हजारे की सक्रियता पर सवाल
किसान नेता निर्मल सिद्धू ने कहा कि किसान आंदोलन से पहले दिन से जुड़ा हुआ हूं और किसानों को हो रही परेशानियों से बहुत ही अच्छी तरह से वाक़िफ हूं। किसानों को अन्ना हज़ारे के नेतृत्व की ज़रूरत नहीं है। वह तो भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के तौर पर काम करते हैं। पिछली बार भी भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से उन्होंने कांग्रेस को कमज़ोर करने के लिए आंदोलन किया था ना कि जनता की भलाई के लिए किया था। अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में किसान कभी भी आंदोलन नहीं करेंगे क्योंकि वह बीजेपी के एजेंट हैं। वह सिर्फ़ और सिर्फ़ भारतीय जनता पार्टी को फ़ायदा पहुंचाने का काम कर किसानों के आंदोलन को कमज़ोर बनाने की योजना तैयार कर रहे हैं।
किसानों की मांगें पूरी नहीं हो पाईं- अन्ना हजारे
विकल पचार ने कहा कि सरकार की कार्यशैली को लेकर बैठक में सरकार पर सभी किसान नेताओं ने गंभीर सवाल उठाए और अन्ना हजारे से विस्तार से चर्चा हुई। किसान आंदोलन को लेकर विचार विमर्श किया गया। किसान आंदोलन को लेकर अन्ना हजारे ने कहा कि हमने साल 2018 के अंदर देश के काफ़ी किसान संगठनों को आमंत्रित करके 17 मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इसमे मुख्य मांग केंद्र की कृषि मूल्य आयोग हटा दिया जाए जिससे किसान को सही मूल्य मिल पाएगा। अफ़सोस की बात है किसान संगठनों की तरफ़ से हमारी उम्मीद से कम सहयोग मिला, जिसकी वजह सरकार के पास भेजी गई किसानों की मांगें आज तक पूरी नहीं हो पाई।
24 सितंबर को होगी बैठक
अन्ना हजारे ने कहा आंदोलन करने को लेकर दिल्ली में 24 सितंबर को बैठक करके जल्द कार्यकारिणी गठित किया जाएगा। बैठक में मौजूद देश के किसान नेताओं ने अपनी सहमति जताई। अन्ना हजारे ने कहा कि
अगर हमारे द्वारा उठाई गई 17 मांगे पूरी हो जाती तो आज देश के किसानों को किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता
मौजूदा किसान आंदोलन में किसान की दशा पर दुख ज़ाहिर करते हुए कहा कि मैं आज बहुत दुखी हूं क्योंकि मैंने आज तक जितने भी आंदोलन किए वो हमेशा सफल हुए हैं। अन्ना हजारे ने सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर काफी गंभीर और बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनतंत्र देश की सबसे बड़ी ताक़त है। जनतंत्र के सहयोग से ही आज लोकतंत्र को बचाना मुमकिन है, अगर जनतंत्र मज़बूती के साथ एकजुट होकर खड़ा हो जाता है। जनतंत्र के सामने राजनीतिक पार्टियों को नतमस्तक होने में देर नहीं लगेगी। अन्ना हजारे ने कहा कि पूरे देश के अंदर ऐसा कोई भी गांव नहीं है जहां किसान नहीं हो अगर देश का किसान एकजुट होकर खड़ा हो गया तो मोदी सरकार को घुटनों के बल आने में वक़्त नहीं लगेगा। आज राजनीतिक पार्टियां के नेता जीवन के असली मूल मंत्र को भूल कर जनतंत्र का दुरुपयोग कर पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसे कमाने में मशगूल हो गए हैं। इन सबकी वजह से आम जनता और देश के किसान की अनदेखी की जा रही है।
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