महंगाई की मार के बावजूद पंजाब में लागत से भी कम दामों में बिक रहे अंडे, जानिए क्यों ?
: यूक्रेन संकट की वजह से पंजाब में आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ़ अब अंडों की क़ीमतों में काफी गिरावट देखी जा रही है।
चंडीगढ़, 2 मार्च 2022 : यूक्रेन संकट की वजह से पंजाब में आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ़ अब अंडों की क़ीमतों में काफी गिरावट देखी जा रही है। यूक्रेन युद्ध की वजह से अभी महंगाई ज़्यादा बढ़ने लगी है लेकिन उससे पहले से भी लोग महंगाई की मार से परेशान हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि जब सब चीज़ों के दाम में बढ़ोतरी देखी जा रही है तो फिर अचानक से अंडे के दामों में गिरावट क्यों आ गई है। अंडे की कीमतों में लगातार गिरावट की सबसे बड़ी वजह बाजार में अंडे की डिमांड नहीं है। पंजाब में करीब 3 महीनों के दौरान अंडे के भावों में काफ़ी गिरावट देखने को मिल रही है।

कारोबारियों के लिए लागत भी निकालना मुश्किल
अंडे के सप्लॉयर्स की मानें तो 3 महीने के अंदर अंदर प्रति सैकड़ा अंडों 180 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। ग़ौरतलब है कि अंडे के दामों में गिरावट आ रही है तो वहीं दूसरी ओर पोल्ट्री उद्योग की लागत में क़रीब 20 फ़ीसदी तक का इज़ाफ़ा देखा गया है। अंडा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि मौसम में बदलाव होने की वजह से अंडा की खपत कम हो रही है और आने वाले दिनों में गर्मी की वजह से भी अंडे की डिमांड कम हो जाएगी। वहीं अंडा उत्पादकों का कहना है कि अंडे की कीमत में कमी और मुर्गियों की खुराक के दाम में इज़ाफ़ा होने की वजह से लागत तक निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। ज़्यादातर अंडा उत्पादकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अंडे की क़ीमत 3 महीने पहले यानी दिसम्बर 2021 में प्रति सैकड़ा 548 रुपये थी। 1 जनवरी 2022 को 28 रुपये प्रति सैकड़ा दामों में गिरावट दर्ज की गई और 520 रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से अंडे की मार्केटिंग हुई।

अंडे के दामों में लगातार हो रही गिरावट
1 फरवरी 2022 को 520 रुपये प्रति सैकड़ा से घटकर अंडे की क़ीमत 478 रुपये हो गई। इसके बाद 20 फरवरी को 390 रुपये प्रति सैकड़ा कीमत दर्ज की गई। वहीं पांच दिनों के बाद 25 फरवरी को अंडे की क़ीमत 365 रुपये प्रति सैकड़ा तक दर्ज की गई। होलसेल बाज़ार में अंडे की क़ीमत बाजार में कीमत 365 रुपये है और अंडा उत्पादक के फार्म से लेने पर अंडे क़ीमत 348 रुपये प्रति सैकड़ा ही मिल रही है। पोल्ट्री कारोबारियों की मानें तो देश के अन्य राज्यों में भी अंडे की डिमांड कम हो गई है। इस वजह से अंडे की क़ीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। स्थानीय बाज़ारों के अलावा हिंदुस्तान के विभिन्न राज्यों में अंडे की सप्लाई की जाती थी। लेकिन अभी धंधा बिल्कुल मंदा हो चुका है।

पोल्ट्री कारोबारियों को हो रही परेशानी
पोल्ट्री कारोबारियों के लिए मौजूदा हालात बहुत ही मुश्किल भरा है। यूक्रेन और रूस विवाद की वजह से भी काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन संकट की वजह से डी- आयल्ड राइस ब्रान की कीमत नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ कर 1300 रुपये पर प्रति क्विंटल हो गया है। इसमें बढ़ोतरी पिछले एक हफ़्ते में हुई है। मुर्गी के लिए डी- आयल्ड राइस ब्रान ही सबसे बढ़िया खुराक है। वहीं सोयाबीन फ्लेक्स के दाम 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 6 हज़ार 500 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। 1500 से बढ़ कर 2 हजार रुपये प्रति क्विंटल बाजरा की क़ीमत हो गई है। पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोग पिछले दिनों के मुक़ाबले 20 फीसद तक ज़्यादा दाम देकर मुर्गियों का ख़ुराक ख़रीद रहे हैं।

लागत से भी कम दामों में बेचे जा रहे अंडे
एक अंडे की उत्पादन की लागत क़रीब 3 रुपये 50 पैसे आ रही है जबकि फार्म पर अंडा सिर्फ़ 3 रुपये 48 पैसे की हिसाब से बिक रहा है। यह सोचने वाली बात है कि अंडे की लागत से भी कम रुपये में अंडे क्यों बेचे जा रहे हैं। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अंडे की डिमांड में कमी आना बताई जा रही है, इसके साथ ही यूक्रेन संकट की वजह से मुर्गियों के ख़ुराक के लिए सामग्री के दामों में इज़ाफ़ा होना बताया जा रहा है। चूंकि मौसम बदल रहा है इसलिये अंडा व्यापारियों के लिये अंडे को स्टॉक करना भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। क्योंकि गर्मी के दिनों में अंडे बहुत तेज़ी से ख़राब हो जाते हैं। यही वजह है कि लागत से भी कम दामों में अंडे बेचे जा रहे हैं ।
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