पंजाब के सुखजिंदर शहीद, 7 साल की मन्नतों के बाद पैदा हुआ बेटा, 7 माह ही मिला उसे पिता का साया

सुबह की माता-पिता से फोन पर बात, रात में खबर आई शहादत की, पूछा था- बेटा रोता तो नहीं है

Pulwama terrorist attack News, तरनतारन। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में फिदायीन हमले में शहीद हुए 44 जवानों में 4 पंजाब के भी हैं। जिनमें जिला तरनतारन के गंडीविंड धत्तल गांव के सुखजिंदर सिंह (Sukhjinder Singh) ऐसे थे, जिन्होंने 19 साल की उम्र में सीआरपीएफ ज्वॉइन की थी। 2003 में उनकी पोस्टिंग हुई थी और वह 76वीं बटालियन में बतौर कांस्टेबल तैनात थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही गंडीविंड धत्तल गांव समेत पूरे हलका पट्टी विधानसभा क्षेत्र में कोहराम मच गया।

हमले से ठीक पहले भाई को फोन पर पूछा था मेरा बेटा रोता तो नहीं

हमले से ठीक पहले भाई को फोन पर पूछा था मेरा बेटा रोता तो नहीं

सुखजिंदर सिंह के भाई गुरजंट सिंह जंटा बताते हैं, जब हमें पता चला कि वे शहीद हो गए हैं तो यकीन ही नहीं हुआ। सुबह ही उनसे फोन पर बात हुई थी। तब सुखजिंदर सिंह ने पूछा था कि मेरा बेटा रोता तो नहीं है।'

कहा था-'कश्मीर जा रहे हैं, शाम को बात करूंगा', 5 घंटे बाद शहीद

कहा था-'कश्मीर जा रहे हैं, शाम को बात करूंगा', 5 घंटे बाद शहीद

बकौल गुरजंट सिंह जंटा, 'सुखजिंदर सिंह बीती 28 जनवरी को एक माह की छुट्टी के बाद जब ड्यूटी पर लौट रहे थे तो अपने 7 माह के बच्चे गुरजोत सिंह को बार-बार चूम रहे थे। उनकी शादी गांव शकरी की रहने वाली सरबजीत कौर (हरभजन कौर) से हुई थी। गुरुवार सुबह 10:30 बजे जम्मू-कश्मीर से सुखजिंदर ने फोन पर बताया था कि बर्फबारी के चलते रास्ता बंद होने कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, मगर अब रास्ता खुल चुका है तो हम पोस्टिंग के लिए निकल रहे हैं।' मगर हमें क्या मालूम था कि आतंकी उन्हें निशाना बना देंगे। पूरा परिवार सदमे में है। माता-पिता से भाई ने कल की रोज ही तो बात की थी, किंतु अब जैसे दिल पत्थर हो गया है। वह हमारे परिवार की रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा थे।''

7 महीने के गुरजोत सिंह को कैसे बताएंगे कि उसके पापा नहीं रहे

7 महीने के गुरजोत सिंह को कैसे बताएंगे कि उसके पापा नहीं रहे

गुरजंट सिंह जंटा के मुताबिक, भाई ने फोन पर यह भी कहा था कि वह रात को दोबारा फोन करेंगे, लेकिन रात होने से पहले ही उनके शहीद होने की खबर आ गई। अब 7 महीने के गुरजोत सिंह को हम कैसे बताएंगे कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं रहे हैं। उनकी पत्नी बेसुध हैं, जिन्हें भी लग नहीं रहा कि उनके पति अब नहीं रह गए हैं। गांव वाले भी उनके शव के आने का इंतजार कर रहे हैं।

सालों की मन्नतों के बाद पैदा हुआ बेटा, 7 माह ही मिला पिता का साया

सालों की मन्नतों के बाद पैदा हुआ बेटा, 7 माह ही मिला पिता का साया

पिता गुरमेज सिंह कहते हैं, 'कितनी मन्नतें मांगने पर पोता हुआ था सुखजिंदर की शादी के 7 साल बाद। लेकिन अब मुझसे सुखजिंदर छिन गया है और पोते से उसके पिता का साया उठ गया है। सुखजिंदर ने फोन पर यह भी कहा था कि कुछ दिनों में वह बच्चे के लिए ढेर सारे खिलौने और बहन लखविंदर कौर के लिए कश्मीरी अखरोट भिजवाएगा। मगर, अब हमारा सब खत्म हो गया।'

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