गुरू नाभा दास की पुण्यतिथि पर सीएम भगवंत मान ने किया नमन
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संत गुरू नाभादास के जन्मदिन पर उन्हें याद किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा पवित्र ग्रंथ भगतमाल के रचयिता एवं रचयिता संत गुरु नाभा दास जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। गुरु जी ने सतयुग से लेकर कलयुग तक लगभग हर संत का जीवन वृत्तांत लिखा और मानवता को सर्वोच्च स्थान दिया।
बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने गुरू नाभा दास की 16वीं जयंती पर अवकाश घोषित करने का ऐलान किया था। सभी स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान आज बंद रहेंगे। इसके अलावा सरकारी दफ्तर में भी अवकाश रहेगा।

बता दें कि गुरु नाभा दास का मूल नाम नारायण दास था। वह एक महान हिंदू संत, धर्मशास्त्री और भक्तमाल के लेखक थे। इस पवित्र ग्रंथ में उन्होंने सत युग से लेकर कल युग तक फैले संतों की जीवन कहानियों का सावधानीपूर्वक वर्णन किया है। वर्ष 1585 में लिखी गई उनकी महान कृति भक्तमाल को आध्यात्मिक आख्यानों का खजाना माना जाता है।
नाभा दास का जन्म 8 अप्रैल 1537 को तेलंगाना में गोदावरी नदी के किनारे भद्राचलम गांव में हुआ ता। वह गुरु नाभा दास महाशा समुदाय से थे। पांच की उम्र में वह अनाथ हो गए थे जिसके बाद संत अगर दास और कील दास उन्हें राजस्थान के जयपुर के पास गलता धाम मंदिर में ले गए।
ज्ञान और बुद्धिमत्ता के चलते नाभा दास को 200 से अधिक संतों के जीवन का वर्णन करने का काम सौंपा गया था। गुरु नाभा दास महाशा समुदाय से थे, जिन्हें डूम या डुमना समुदाय के नाम से भी जाना जाता है। महाशा लोग बांस का उपयोग करके टोकरियाँ और अनाज भंडारण कंटेनर बनाने में कुशल हैं।
पंजाब में लगभग 30 लाख लोग महाशा समुदाय के हैं, जिनमें से लगभग एक लाख अकेले पठानकोट में रहते हैं। समुदाय में 41 मंदिर हैं, जिनमें से 25 पठानकोट में हैं। उनकी उपस्थिति क्षेत्र के लगभग 421 गांवों तक फैली हुई है, जिनमें महत्वपूर्ण समुदाय गुरदासपुर और अमृतसर में भी पाए जाते हैं।












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