'अमरिंदर के गढ़ में झाड़ू से सफ़ाई', 20 सालों से रहा क़ब्ज़ा फिर भी कैप्टन नहीं बचा पाए अपना क़िला

पंजाब विधानसभा चुनाव में कैटन अमरिंदर सिंह की वजह से पटियाला अर्बन हॉट सीटों में शुमार की जा रही थी।

चंडीगढ़, 11 मार्च 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव में कैटन अमरिंदर सिंह की वजह से पटियाला अर्बन हॉट सीटों में शुमार की जा रही थी। ज़्यादातर चुनावी रणनीतिकारों का यह मानना था कि पटियाला पर कैप्टन का क़ब्ज़ा है वहां से अमरिंदर सिंह का हराना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन चुनावी नतीजों में आम आदमी पार्टी की ऐसी आंधी चली की कैप्टन अपने गढ़ में हारे ही साथ ही पटियाला की सभी नौ सीटों पर आम आदमी पार्टी ने क़ब्ज़ा जमा लिया। कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर अपनी सियासी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाते हुए चुनावी बिगूल फूंका था लेकिन हार का सामना करना पड़ा। पटियाला में कैप्टन अमरिंदर सिंह की पकड़ अच्छी मानी जा रही थी। सियासी जानकारों का मानना था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के खाते में ही पटियाला की सीटें जाएंगी, हालांकि सभी अनुमान ग़लत साबित हुए।

AAP उम्मीदवार ने दी कैप्टन को मात

AAP उम्मीदवार ने दी कैप्टन को मात

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस पटियाला शहरी सीट से अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरे थे। चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह की भी क़िस्मत दांव पर लगी हुई थी । उनके खिलाफ़ आम आदमी पार्टी की तरफ़ से अजीतपाल सिंह कोहली ने चुनावी ताल ठोका था। ग़ौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अजीत पाल सिंह कोहली पहली बार ही चुनावी मैदान में उतरे थे और उन्होंने पहली बार में ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को उनके गढ़ में ही मात दे दी। पटियाला के सियासी इतिहास की बात की जाए तो कैप्टन अमरिंदर सिंह 2002 से 2014 तक पटियाला सीट से विधायक रहे हैं। 2014 में लोकसभा चुनाव में भाजपा के अरुण जेटली को अमृतसर से हराने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया था।

20 सालों से पटियाला सीट पर रहा कैप्टन का क़ब्ज़ा

20 सालों से पटियाला सीट पर रहा कैप्टन का क़ब्ज़ा

2014 में पटियाला से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस्तीफ़ा देने के बाद अपनी पत्नि प्रिनीत कौर को उपचुनाव लड़ाया था और उन्होंने (प्रिनीत कौर) ने जीत भी हासिल की थी। 2014 से 2017 तक वह पटियाला से विधायक रही थीं। उसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर फिर से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दांव आज़माते हुए जीत हासिल की। कांग्रेस को बहुमत मिली और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने। इस तरह से देखा जाए तो पिछले 20 सालों से पटियाला सीट पर कैप्टन अमरिंदर सिंह का क़ब्ज़ा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह पत्नी प्रीनीत कौर यहां से कांग्रेस की टिकट पर सांसद चुनी गईं थीं। शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार सुरजीत सिंह रखड़ा को उन्होंने 1 लाख 62 हज़ार 718 वोटों से हराया था। पंजाब के सियासी जानकारों का मानना था कि कैप्टन की पत्नी की वजह से कैप्टन को सियासी फ़ायदा पहुंचेगा क्योंकि प्रीनीत कौर पटियाला से सांसद हैं।

भाजपा के साथ गठबंधन पड़ा महंगा

भाजपा के साथ गठबंधन पड़ा महंगा

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी सियासी पार्टी बनाकर भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरे । उन्होंने पटियाला अर्बन सीट चुनावी बिगुल तो फूंक दिया लेकिन इस बार वह कांग्रेस के साथ नहीं थे। कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया था। जब वह कांग्रेस में थे तो उन्हें कांग्रेस के साथ जुड़े होने का भी फ़ायदा मिल जाता था। लेकिन किसान आंदोलन की वजह से इस बार सियासी समीकरण बदले । भाजपा विरोधी लहर थी इसके बावजूद उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन कर सियासी समर में उतरे थे। दूसरी ओर किसान नेता चुनावी मैदान में थे । इन सब समीकरणों को देखते हुए लग रहा था कि कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने गढ़ में ही हार जाएंगे। कैप्टन से कहां चूक हुई इस मामले में सियासी जानकारों का कहना है कि वह अपने कार्यकाल के दौरान जनता की पहुंच से दूर थे। किसान आंदोलन के दौरान किसानों के साथ थे लेकिन उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करना उनके लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इसके साथ ही पिछले चुनाव के दौरान किए गए घोषणाओं को अमलीजामा नहीं पहनाना भी उनकी हार की एक बड़ी वजह है।

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