क्या मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले कोई भी नेता ले सकता है प्रशासनिक फ़ैसले, जानिए नियम
पंजाब में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद पार्टी के सभी नेताओं में खुशी की लहर है।
चंडीगढ़, 14 मार्च 2022। पंजाब में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद पार्टी के सभी नेताओं में खुशी की लहर है। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान 16 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लने वाले हैं लेकिन उससे पहले ही वह एक्शन मोड में हैं। शपथ ग्रहण से पहले ही भगवंत मान ने दर्जनों नेताओं से उनकी सिक्योरिटी वापस लेने का आदेश दिया है। इसके पीछे उन्होंने दलील दी है कि नेताओं की सुरक्षा से ज़्यादा ज़रूरी जनता की सुरक्षा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले कोई भी नेता प्रशासनिक फ़ैसले ले सकता है या नहीं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके क्या नियम हैं।

बिना शपथ ग्रहण के नहीं ले सकते प्रशासनिक फ़ैसले
पंजाब में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की है, इसके साथ पार्टी के नेता एक्शन मोड में नज़र आ रहे हैं। इसी कड़ी में पंजाब के भावी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के दिग्गज नेताओं की सिक्योरिटी हटा दी है। इस मामले में जानकारों का कहना है कि कोई भी नेता जब तक शपथ नहीं लेता है तब तक वह किसी भी तरह के प्रशासनिक या फिर कोई और कार्य के फ़ैसले नहीं ले सकता है। अक्सर यह देखा जाता है कि जो पार्टी जीत दर्ज करती है उनके सीएम उम्मीदवार खुद को बतौर सीएम समझते हुए शपथ लेने से पहले ही कई फ़ैसले लेने लगते हैं जो कि ग़तल है। उनके मौखिक आदेश पर ही संबंधित अधिकारी काम में लग जाते हैं, संवैधानिक नियम के मुताबिक देखा जाए तो जब तक लिखित आदेश नहीं मिलता है तब तक कोई भी फ़ैसले को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता है।

मौखिक आदेश पर ही कार्रवाई शुरू !
भावी मुख्यमंत्री जब तक मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपना कार्यभार नहीं संभाल लेते हैं तब तक उन्हें किसी भी प्रकार का फ़ैसला लेने का संवैधानिक तौर पर अधिकार नहीं होता है। हालांकि भावी मुख्यमंत्री के मौखिक आदेशों पर ही संबधित अधिकारी कार्रवाई शुरू कर देते हैं, क्योंकि उन्हें भी पता होता है कि आने वाले एक दो दिनों में संबंधित व्यक्ति मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाला है। अगर उनकी बात नहीं मानी तो सीएम बन्ने के बाद सबसे पहले उसी अधिकारी पर गाज गिरेगा जिसने बात नहीं मानी थी। इसलिए ऐसी स्थिति में मौखिक आदेशों पर ही कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। लेकिन संवैधानिक एतबार से यह बिल्कुल भी सही नही है।

पंजाब के नेताओं की हटाई गई सुरक्षा
पंजाब के मनोनीत मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्रियों सहित 122 पूर्व विधायकों को सुरक्षा प्रदान करने वाले लगभग 400 पुलिस कर्मियों को वापस लेने फ़ैसला लिया है। उन्होंने कहा कि नेताओं से ज्यादा 3 करोड़ जनता की सुरक्षा ज्यादा ज़रूरी है। पंजाब के जिन विधायकों की सुरक्षा हटाई गई है उनमें राज कुमार वेरका, मनप्रीत सिंह बादल,रणदीप सिंह नाभा,भारत भूषण आशु,अजैब सिंह भट्टी (पूर्व उपाध्यक्ष, विधानसभा), राणा केपी सिंह (पूर्व उपाध्यक्ष, विधानसभा),परगट सिंह,रजिया सुल्ताना,अमरिंदर सिंह, राजा वडिंग,सुखबिंदर सिंह की सुरक्षा हटा ली गई है। इसके साथ ही नवजोत सिंह सिद्धू औऱ नवजोत कौर सिद्धू की भी की भी सुरक्षा वपस ली जाएगी।
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