पंजाब: पार्टियों का बहिष्कार तो सुना था लेकिन इस गांव में होगा चुनाव का बहिष्कार, जानिए क्य़ा है वजह ?
ग्रामीणों ने इस बाबत गांव की एंट्री पर बोर्ड भी लगा दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि सरहदी गांव होने की वजह से सरकार ने गांव में कोई सुविधा मुहैय्या नहीं कराई है।
चंडीगढ़, अगस्त 28, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के नज़दीक आते ही सियासी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुट चुकी हैं। शहर से लेकर गांव तक राजनीतिक पार्टी के कार्यकरता अपनी-अपनी पार्टियों के प्रचार प्रसार में जुट चुके हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि पंजाब में एक गांव ऐसा भी है जहां सियासी पार्टियों के रहनुमाओं का आना पूरी तरह से बैन है। पाकिस्तान से सटे पंजाब के इस आखिरी गांव का नाम दोना तेनू मल यहां नेताओं को आने की इजाज़त नहीं है।

राजनेताओं की एंट्री बैन
ग्रामीणों ने इस बाबत गांव की एंट्री पर बोर्ड भी लगा दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि सरहदी गांव होने की वजह से सरकार ने गांव में कोई सुविधा मुहैय्या नहीं कराई है। उनका कहना है कि सरकार ने अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की तो ग्रामीण आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार (boycott) करेंगे। गांव में न तो पोलिंग बूथ बनने दिया जाएगा और न ही कोई मतदान के लिए जाएगा। गांव वालों का कहना है कि अगर सरकार चाहती है कि गांव चुनाव में हिस्सा ले तो पहले हमारी मांगें पूरी करें। साथ ही गांव के लोगों ने ऐलान किया है की गांव का कोई भी व्यक्ति किसी नेता को अपने घर पर नहीं बुलाएगा। जो इस ऐलान का पालन नहीं करेगा उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। वहीं नेता का उसके घर पर भी विरोध किया जाएगा। इसके लिए वह ख़ुद ज़िम्मेदार होंगे।
सुविधाओं से अछूता है ये गांव
दोना तेनू मल गांव पाकिस्तान से लगते बॉर्डर पर ममदोट से कुछ ही दूरी पर स्थित प्रदेश का आखिरी गांव है। यहां की आबादी करीब 600 है और 500 यहां की वोट है। गांव के लोग कहते हैं कि सरकारें उन्हें मूलभूत सुविधाएं ही नहीं दे पाई है। पीने लायक शुद्ध पानी नहीं है। बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रबंध नहीं है। सेहत सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं हैं। उनका जीवन खेती पर ही निर्भर करता है। हम बॉर्डर पर हैं, जो दुश्मन से लोहा लेना तो जानते हैं।
'पड़ोसी गांव को भी करेंगे जागरुक'
आपको बता दें कि गांव के लोग भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर की अगुवाई में संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय इकाई के अध्यक्ष जगरूप सिंह बराड़ ने कहा कि पहले मंत्रियों और विधायकों के आने पर काजू बादाम और मिठाइयां खिलाते थे। संयुक्त किसान मोर्चा ने जब से जागरुक किया है तब से नेताओं को चाय तक नहीं पूछते हैं। बल्कि सवाल पूछते हैं। क्योंकि वोट लेने के बाद नेता हमारे पास आते ही नहीं हैं। अभी तो दोना तेनू मल गांव में ही ऐसा विरोध किया जा रहा है। कुछ दिनों में बगल वाले गांवों में इस तरह का आंदोलन किया जाएगा।
'नेताओं से सवाल पूछे जाएंगे'
पंचायत सदस्य कंधारा सिंह कहते हैं कि यह पूरे गांव का फैसला है। उनके
गांव में कांग्रेस, अकाली दल, बसपा, भाजपा, आप सभी पार्टियों के नेताओं की एंट्री बैन है। यहां आने वाला नेता उसके होने वाले घेराव का खुद जिम्मेदार होगा। नेताओं ने हमारा कभी कुछ नहीं संवारा है। इस लिए अब चुनाव का बॉयकॉट भी होगा और नेताओं से सवाल भी पूछे जाएंगे।
चुनाव नजदीक हैं तो सभी पार्टियों के नेता अपनी बात रखने लोगों के बीच जा रहे हैं। इसी को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने आह्वान किया है कि गांवों में आने वाले सभी नेताओं से सवाल पूछे जाने चाहिएं कि उनकी पार्टी ने कृषि कानूनों का विरोध क्यों नहीं किया है।












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