पंजाब: विधानसभा चुनाव के बीच बढ़ी BJP की मुश्किलें, बनी बनाई रणनीति पर फिरा पानी
पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल प्रचार प्रसार में जुट चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
चंडीगढ़, अक्टूबर 6, 2021: पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल प्रचार प्रसार में जुट चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कृषि कानूनों की वजह से भारतीय जनता पार्टी किसानों के निशाने पर है। वहीं अब लखीमपुरखीरी कांड की वजह से भी भारतीय जनता पार्टी कि सियासी ज़मीन खिसकती हुई नज़र आ रही है। शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी पहली बार पंजाब के सियासी रण में अकेले उतरने जा रही है। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी रण आसान नज़र नहीं आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में उन सीटों पर ज़्यादा तरजीह दी है जहां हिंदू और दलित आबादी 60 फीसद से ज़्यादा है।

BJP ने तैयार की रणनीति
पंजाब में 73 विधानसभा सीटों पर हिंदू और दलित वोटर जीत या हार का पैमाना तय करने में अहम किरदार निभाते हैं। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी इन्हीं सीटों पर ज़्यादा ध्यान लगा रही है। भारतीय जनता पार्टी का ध्यान उन 45 सीटों पर केंद्रित है जहां 60 फीसद से ज़्यादा हिंदु आबादी है। साथ ही 28 विधानसभा सीटों ऐसी हैं जहां पर हिंदू और दलित की आबादी 60 फीसद से ज़्यादा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति तो तैयार कर ली है लेकिन लखीमपुर खीरी में हुए बवाल के बाद ऐसा लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी जिन सीटों पर फ़ोकस कर रही थी वह भी उनके हाथों से निकल सकता है।

पंजाब में सियासी समीकरण
पंजाब में यूपी के लखीमपुर खीरी में हुए हादसे के बाद से सियासी समीकरण बदल गए हैं। पंजाब के लोगों में लोगों में काफ़ी नाराज़गी है। यूपी के लखीमपुर खीरी कांड के ख़िलाफ़ जगह-जगह प्रदर्शन किए गए। वहीं सभी सियासी दल अपने-अपने तरीक़े से भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। वहीं कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी चंडीगढ़ में नवजोत सिंह के नेतृत्व में राजभवन के बाहर प्रदर्शन किया जिसके बाद उन्हें हिरासत में भी लिया गया। वहीं पंजाब के डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा भी यूपी सीएम योगी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए पांच विधायकों के साथ पीड़ितों से मिलने के लिए लखीमपुर के लिए निकल पड़े थे. शिरोमणि अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल भी लखीमपुर खीरी जाने का ऐलान कर दिया।

लखीमपुर खीरी आने की इजाज़त नहीं
यूपी की योगी सरकार ने पंजाब के सीएम चन्नीब और डिप्टी सीएम रंधावा को लखीमपुर खीरी आने की इजाज़त नहीं दी थी। इजाज़त नहीं मिलने के बाद डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा के नेतृत्वस पंजाब कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल में सड़क के ज़रिए से लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हुए लेकिन यूपी पुलिस ने सूबे में एंट्री करते ही सहारनपुर में रोक लिया वह सभी लोग लखीमपुर खीरी नहीं पहुंच सके। तीन कृषि कानूनों को लेकर पहले से ही पंजाब के किसान नाराज़ चल रहे थे अब लखीमपुर खीरी के हादसे ने आग में घी का काम कर दिया है।पंजाब के मुख्य सचिव को उत्तर प्रदेश सरकार ने पत्र लिखकर आग्रह किया कि राज्य से किसी को भी लखीमपुर खीरी नहीं जाने दिया जाए। लखीमपुर में हुए हादसे के बाद सीआरपीसी की धारा 144 लागू की गई थी। यूपी सरकार को पंजाब सरकार ने चिट्ठी लिखकर कहा है कि सीएम चरणजीत सिंह चन्नी लखीमपुर खीरी जाना चाहते हैं, उनके हेलीकॉप्टर उतारने की इजाज़त दी जाए।

योगी सरकार पर तंज
पंजाब के कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने भी यूपी की योगी सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट किया कि जैसे 3 अक्तूबर, 1977 को इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी जनता पार्टी की सरकार की बर्बादी साबित हुई, वैसे ही 3 अक्तूबर, 2021 को प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी भाजपा सरकार के अंत की शुरुआत है। वहीं शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी यूपी सरकार को घेरा, उन्होंने कहा कि किसान लखमीरपुर खीरी में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ किसानों को कुचलने के लिए तुरंत हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
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