पंजाब-हरियाणा समेत 14 राज्यों के किसानों का 15 अगस्त के बाद बड़े संघर्ष का ऐलान, पोल खोल रैलियां होंगी
चंडीगढ़। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने अपनी रणनीति में बदलाव का ऐलान किया है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल का कहना है कि, 15 अगस्त के बाद 14 राज्यों के किसान रणनीति बदलकर संघर्ष तेज करेंगे। इस संघर्ष की रणनीति किसानों के अगुआ संयुक्त मीटिंग कर तय करेंगे। उन्होंने कहा कि, "अब किसानों का संघर्ष सिर्फ फसलों की लड़ाई नहीं, बल्कि नस्लों की लड़ाई बन चुका है। जब तक सरकार तीनों कानून वापस नहीं लेती, किसान पीछे नहीं हटेंगे।" कई किसान संगठनों ने उन्हें सहमति दी।
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किसान नेता ने कहा कि, 26 तारीख को हमारे आंदोलन के 8 माह पूरे होंगे। इस दौरान उत्तर भारत के बजाय अब अन्य राज्यों में भी सरकार के खिलाफ पोल खोल रैलियां की जाएगी। भाकियू (राजेवाल) अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने यह बात पंजाब के महलकला में लोगों को संबोधित करते हुए कही। वहां राजेवाल किरनजीत कौर के बरसी समागम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, अब देश के लगभग आधे राज्यों में सरकार की पोल खोल रैलियां होंगी। जिनमें पंजाब की खास भूमिका होगी।"

इधर, टिकैत बोले- आंदोलन चलता रहेगा
वहीं, भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। टिकैत ने सरकार को एक बार फिर कृषि कानूनों को वापस लेने को कहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि, यदि सरकार किसानों की हितैषी है तो एमएसपी पर कानून बनाए। उन्होंने कहा कि, सरकार किसानों की ताकत को समझे। अगर किसान की अनदेखी होगी तो किसान सबक भी सिखाना जानता है। उन्होंने ये भी कहा कि आंदोलन को खत्म करने का कोई सवाल ही नहीं है, आंदोलन चलता रहेगा।

आखिर क्यों हो रहा कृषि कानूनों का विरोध?
केंद्र सरकार बीते साल जून में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान हैं। इसको लेकर किसान संगठनों ने बिल पर ऐतराज जताया। सितबंर में किसान संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी। उसके बाद 26 नवंबर को पंजाब-हरियाणा के किसान आंदोलनकारियों ने दिल्ली के लिए कूच किया। तभी से वे लगातार आंदोलनरत हैं और कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी दिल्ली-हरियाणा के सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर एवं यूपी और दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर समेत दिल्ली के अन्य बॉर्डर्स पर धरना दे रहे हैं।












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