पंजाब: सिद्धू परिवार का ये चुनाव प्रचार है या पार्टी का दुष्प्रचार, कांग्रेस में चरम पर गुटबाज़ी
पंजाब में मतदान के दिन क़रीब आते ही चुनाव प्रचार में तेज़ी आ गई हैं। जहां सभी दलों के प्रत्याशी अपनी पार्टी के तारीफ़ों के कसीदे पढ़ रहे हैं, वही दूसरी तरफ़ कांग्रेस गुटबाज़ी का शिकार हो रही है।
चंडीगढ़, 12 फरवरी 2022। पंजाब में मतदान के दिन क़रीब आते ही चुनाव प्रचार में तेज़ी आ गई हैं। जहां सभी दलों के प्रत्याशी अपनी पार्टी के तारीफ़ों के कसीदे पढ़ रहे हैं, वही दूसरी तरफ़ कांग्रेस गुटबाज़ी का शिकार हो रही है। चरणजीत सिह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करते ही पार्टी के सियासी समीकरण बदल गए हैं। एक तरफ़ चरणजीत सिंह का परिवार चन्नी के लिए चुनावी प्रचार में जुटा हुआ है। वही दूसरी ओर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का परिवार उनके (सिद्धू) लिए प्रचार-प्रसार कर रहा है। चरणजीत चन्नी की पत्नी डॉ. कमलजीत कौर और उनकी बहू सिमरनधीर कौर जनता की मुश्किलों पर फोकस कर रही हैं। वहीं सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू और बेटी राबिया सिद्धू चरणजीत सिंह चन्नी पर ही हमलावर हैं। ऐसे में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सिद्धू परिवार चुनावी प्रचार कर रहा है या फिर पार्टी का दुष्प्रचार कर रहा है।

अपने ही हलके तक नवजोत सिद्धू सीमित
पंजाब के मुख्यमंत्री पार्टी के लिए पूरे प्रदेश में चुनावी प्रचार कर रहे हैं वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने ख़ुद हो अपना विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित कर लिया है। सिद्धू का कहना है कि चुनावी कैंपेन की अगुवाई पार्टी का सीएम चेहरा ही करता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम पद का चेहरा थे और उन्होंने चुनावी कैंपेन की कमान संभाली थी। इस बार चन्नी सीएम उम्मीदवार हैं तो वही कमान संभालेंगे। सिद्धू का कहना है कि पार्टी आलाकमान के कहने पर ही वह चुनाव प्रचार करेंगे। पार्टी अध्यक्ष की जो ज़िम्मेदारी एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्शन की होती है वह उसे पूरा करेंगे। इम्प्लीमेन्टेशन करना चरणजीत सिंह चन्नी का काम है। आपका बाते दे कि हाल ही में सिद्धू ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि वह सभी धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। यक़ीन दिलाता हूं की मेरे ज़िंदा रहने तक कोई भी ईसाई धर्म पर बुरी नजर नहीं डाल सकता है।

ईसाई मतदाताओं को लुभाने की कोशिश
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के इस बयान के बाद यह चर्चा है तेज़ है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू ईसाई मतदाताओं के ज़रिए अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं। पंजाब के सियासी समीकरण की बात की जाए तो पंजाब में ईसाई समुदाय को तीन वर्गों में गिना जाता है। एक वर्ग तो वह है जिनके पूर्वजों ने ब्रिटिश शासन के दौरान ईसाई धर्म अपना लिया था। दूसरे वर्ग में वह लोगा आते हैं जो ग़रीब और अशिक्षित हैं और उनपर डेरा का प्रभाव ज्यादा हैं। वहीं तीसरे वर्ग में सबसे बड़े समूह में दलित हैं जो ईसाई धर्म को मानते हैं। ग़ौरतलब है कि यह सभी वर्ग इसाई धर्म को निभाते हैं लेकिन आधिकारिक तौर से उन्होंने सरकारी दस्तावेज़ों में धर्मांतरण नहीं किया है। पंजाब की सियासत में सभी नेताओं और सियासी दलों की निगाहें इन पर रहती हैं क्योंकि इन प्रभाव में बने बनाए समीकरण की भी बाज़ी पलट जाती है।

चन्नी पर सिद्धू परिवार का हमला
नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी भी चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम उम्मीदवार घोषित करने की वजह से आलाकमान से नाराज़ चल रही हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी की है कि शिक्षा, योग्यता और काम के आधार पर किसी को भी इतने बड़े ओहदे पर बैठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धू मुख्यमंत्री पद के लिए सही उम्मीदवार हैं यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है। राहुल गांधी को सीएम उम्मीदवार के नाम की घोषणा करने के लेकर गुमराह किया गया है। अपनी पति के चुनाव प्रचार के दौरान वह इस बात का ज़िक्र भी करती हुई नज़र आ रही हैं। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू की बेटी राबिया सिद्धू भी चुनाव प्रचार के दौरान चन्नी पर हमला करती हुईं नज़र आ जाती हैं। हाल ही में उन्होंन चरणजीत सिंह चन्नी पर निशाना साधते हुए कहा था कि चन्नी कहते हैं वह ग़रीब हैं तो फिर उनके पासे करोड़ों रुपये की संपत्ति कैसे है ? कोई गरीब इंसान करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक कैसे हो सकता है।
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