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Punjab Election Special: जालंधर कैंट से हैट्रिक लगा पाएंगे परगट सिंह या टूटेगा उनका वहम, जानिए इतिहास

पंजाब चुनाव के मद्देनज़र जालंधर कैंट विधानसभा सीट भी हॉटसीटों में शुमार की जा रही है। यहां से मौजूदा विधायक कांग्रेस नेता परगट सिंह हैं।

चंडीगढ़, 4 फरवरी 2022। पंजाब चुनाव के मद्देनज़र जालंधर कैंट विधानसभा सीट भी हॉटसीटों में शुमार की जा रही है। यहां से मौजूदा विधायक कांग्रेस नेता परगट सिंह हैं। ग़ौरतलब है कि परगट सिंह ने पहली 2012 के विधानसभा चुनाव सियासी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर जीत दर्ज की थी। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में परगट सिंह ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की थी। इस बार वह हैट्रिक लगाने की मक़सद से फिर से कांग्रेस की टिकट पर जालंधर कैंट से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं इस सीट से आम आदमी पार्टी ने सुरिंदर सिंह सोढी को उम्मीदवार बनाया है। शिरोमणि अकाली दल ने जगबीर बराड़ को टिकट दिया है और भारतीय जनता पार्टी ने सरबजीत सिंह मक्कड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है।

1848 में पड़ी थी छावनी की नींव

1848 में पड़ी थी छावनी की नींव

जालंधर कैंट विधानसभा सीट के सियासी इतिहास की बात की जाए तो पंजाब के जालंधर जिले की एक विधानसभा सीट जालंधर कैंट भी है। यह विधानसभा सीट सेना की छावनी वाले इलाके की सीट है। अंग्रेज़ोर और सिखों के बीच हुई लड़ाई के बाद जालंधर छावनी की नींव 1848 में पड़ी थी। यह देश की सबसे पुरानी छावनी क्षेत्रों में से एक छावनी जालंधर कैंट है। जालंधर कैंट विधानसभा सीट से 2012 के विधानसभा चुनाव में परगट सिंह ने शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर कांग्रेस के उम्मीदवार जगबीर सिंह बराड़ को शिकस्त दी थी। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार जगबीर सिंह बराड़ को 6 हज़ार 798 वोट से हराया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में परगट सिंह ने कांग्रेस की टिकट पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार सरबजीत सिंह मक्कड़ 29 हज़ार 124 वोटों से हराया था। वहीं आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हरकिशन वालिया तीसरे नबंर पर थे।

SAD और BJP आमने-सामने

SAD और BJP आमने-सामने

जालधर कैंट विधानसभा सीट पर इस बार सियासी समीकरण बदले हुए नज़र आ रहे हैं। चूंकि इस बार भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल बिना गठबंधन के चुनावी मैदान में उतरी है। इसलिए दोनों ने सियासी रण में अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ग़ौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सरबजीत सिंह मक्कड़ ने शिमोणि अकाली दल की टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस बार के चुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। सियासी जानकारों की मानें तो इस बार परगट सिंह के हैट्रिक लगाने की संभावना ज़्यादा है। क्योंकि शिअद और भाजपा के उम्मीदवार एक दूसरे के वोट काटने का काम करेंगे और तीसरी पार्टी को इसका फ़ायदा पहुंचेगा।

पार्टी से ज़्यादा प्रत्याशी का महत्व

पार्टी से ज़्यादा प्रत्याशी का महत्व

पंजाब के सियासी जानकारों का मानना है कि परगट सिंह ने जब 2012 में चुनाव लड़ा था वह अकाली दल में थे और जीत दर्ज की थी। 2017 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा फिर जीत दर्ज की। इससे यह क़यास लगाए जा रहे हैं कि जालंधर कैंट विधानसभा सीट पर पार्टी से ज़्यादा प्रत्याशी के चेहरे पर मतदान हुआ है। इस सीट के दो बार के चुनाव परिणाम से यह लग रहा है कि परगट सिंह की पकड़ इस विधानसभा सीट पर अच्छी है। उन्हें ज़्यादा मेहनत करने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि शिअद-भाजपा के गठबंधन के वक्त दोनो पार्टी का वोट एक ही प्रत्याशी को मिलता था। इस बार शिअद और भाजपा का वोट अलग अलग डलेगा। कहीं न कहीं यह कांग्रेस के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकती है।


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