Punjab Election Special: भोआ विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास, कैसे रहे हैं यहां के सियासी समीकरण ?

पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन क़रीब हैं। सभी सियासी दलों के प्रत्याशी अपने हलके में प्रसार प्रचार कर जीत दर्ज करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं।

चंडीगढ़, 7 फरवरी 2022। पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन क़रीब हैं। सभी सियासी दलों के प्रत्याशी अपने हलके में प्रसार प्रचार कर जीत दर्ज करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं। आज हम आपको भोआ विधानसभा सीट के सियासी समीकरण और हालात बताने जा रहे हैं। भोआ विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर जोगिंदर पाल चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने लाल चंद कटारूचक को उम्मीदवार घोषित बनाया है। बहुजन समाज पार्टी ने राकेश महाशा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने सीमा कुमारी को चुनावी रण में उतारा है।

मूलभूत सुविधाओं की आज भी है कमी

मूलभूत सुविधाओं की आज भी है कमी

भोआ विधानसभा सीट पंजाब के पठानकोट जिले में आती है, पंजाब के 34 सुरक्षित विधानसभा सीटों में भोआ सीट का भी नाम शुमार है। यही वजह है कि यहां से सिर्फ़ अनुसुचित जाती से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं। यहां की आधी से ज़्यादा आबादी के आय का स्रोत किसानी है। इस सीट के मतदाता ज़िंदगी गुजर बसर करने के लिए पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं। यहां के लोगों को रोज़गार की तलाश के लिए दूसरों शहरों की तरफ़ रुख़ करना पड़ता है। यही वजह है कि ज़्यादातर लोग कृषि के ज़रिए ही गुज़ारा करते हैं। भोआ विधानसभा सीट आज की तारीख में भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

पंजाब बॉर्डर के क़रीब है भोआ सीट

पंजाब बॉर्डर के क़रीब है भोआ सीट

विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र भोआ सीट भी काफ़ी अहम मानी जा रही है। भोआ विधानसभा सीट के इतिहास की बात की जाए तो यहां भारतीय जनता पार्टी का क़ब्ज़ा माना जाता था । 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पंजाब के भोआ विधानसभा सीट विकास के मामले में अभी भी पिछड़ा हुआ है। पंजाब के बॉर्डर पर होने की वजह से यह सीट काफ़ी संवेदनशील है। एक तरफ़ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर की सीमा है। यहां दलित समुदाय के मतदाताओं का बोल बाला है, क़रीब 1 लाख 70 हज़ार मतदाताओं की तादाद है। दूसरे विधानसभा सीटों के मुक़ाबले यहां का मतदान फीसद काफ़ी अच्छा रहा है।

10 साल रहा था भाजपा का क़ब्ज़ा

10 साल रहा था भाजपा का क़ब्ज़ा

भोआ विधानसभा सीट के सियासी समीकरण की बात की जाए तो 2007 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां से जीत दर्ज की थी। भाजपा उम्मीदवार विशंभर दास ने जीत दर्ज किया था। 2012 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ही इस सीट पर परचम लहराया था लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने विशंभऱ दास की जगह पर सीमा कुमारी को उम्मीदवार घोषित किया था। सीमा कुमारी ने कांग्रेस प्रत्याशी को शिकस्त देते हुए जीत दर्ज की थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, कांग्रेस उम्मीदवार जोगिंदर पाल ने भाजपा उम्मीदवार सीमा कुमारी को हराया था। जोगिंदर पाल ने 27 हज़ार 496 वोटों से भाजपा उम्मीदवार सीमा कुमारी को शिकस्त दिया था।

कांग्रेस और भाजपा के बीच मुक़ाबला

कांग्रेस और भाजपा के बीच मुक़ाबला

भोआ विधानसभा सीट पर अलग-अलग दलों के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है लेकिन इसे भाजपा का गढ़ कहा जाता था। दस साल तक भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर क़ब्ज़ा जमाया हुआ था। ग़ौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सीमा कुमारी और कांग्रेस उम्मीदवार जोगिंदर पाल के बीच मुकाबला था। कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। वहीं इस बार के विधानसभा चुनाव में दोबारा से भाजपा से सीमा कुमारी और कांग्रेस के उम्मीदवार जोगिंदर पाल आमने सामने हैं। सियासी जानकारों की मानें तो भाजपा के वोटों का शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी की वजह से ध्रुवीकरण हो सकता है और दूसरे दलों के उम्मीदवारों को सियासी फ़ायदा पहुंच सकता है।


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