हाईकमान से बोले कांग्रेस के 10 विधायक- 'कैप्टन की वजह से पार्टी का वजूद, उन्हें ना करें नाराज'
चंडीगढ़, 18 जुलाई: पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जंग जारी है। शुरू में तो कैप्टन हावी थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हाईकमान की दखल की वजह से सिद्धू का पलड़ा भारी लग रहा है। अब कांग्रेस के विधायक भी इस लड़ाई में कूद पड़े हैं। रविवार को पंजाब के 10 विधायकों ने संयुक्त बयान जारी कर सिद्धू से माफी मांगने को कहा। साथ ही हाईकमान से मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को नाराज ना करने की अपील की। उन्होंने साफतौर पर कहा कि पंजाब में कैप्टन ही कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं।

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विधायकों ने कहा कि 1984 में जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दरबार साहिब पर सैन्य टुकड़ी को भेजा। उसके बाद हुए सिख दंगों में हजारों लोग मारे गए। सिर्फ अमरिंदर सिंह ही वो शख्स हैं, जिनकी वजह से कई घटनाओं के बाद पंजाब में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनी। आगे हाईकमान से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कैप्टन को निराश नहीं करना चाहिए। उनकी मेहनत की वजह से आज कांग्रेस पंजाब में अडिग खड़ी हुई है। इस बात में कोई दोराय नहीं कि राज्य में पीसीसी चीफ के पद पर नियुक्त का अधिकार हाईकमान को है, लेकिन कई दिनों से चल रहे झगड़े की वजह से पार्टी का ग्राफ गिरा है।
विधायकों के मुताबिक अमरिंदर सिंह को राज्य में सभी समाज, सभी वर्ग और किसानों का अपार सम्मान प्राप्त है। उन्होंने 2004 के जल समझौते की समाप्ति अधिनियम को पारित करते हुए मुख्यमंत्री के रूप में अपनी कुर्सी खतरे में डाल दी थी। ऐसे में कोई भी फैसला लेने से पहले उनकी प्रतिष्ठा का ध्यान रखा जाए।
कौन-कौन विधायक हैं शामिल?
संयुक्त बयान जारी करने वाले विधायकों में हरमिंदर सिंह गिल, फतेहजंग सिंह बाजवा, गुरप्रीत सिंह जीपी, कुलदीप वैद, बलविंदर लाडी, संतोख सिंह भलाईपुर, जोगिंदरपाल भोआ, AAP छोड़कर कांग्रेस में आए सुखपाल सिंह खैहरा, पिरमल सिंह खालसा और जगदेव सिंह कमालू शामिल हैं।












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