up news: क्या जेल में बंदियों के हाथ में खेल रहा कानून, पीलीभीत में कैदी पर जानलेवा हमला
जेल का नाम सुनते ही कोई भी भला मानस एक पल के लिये ठिठक जाता है। उसके मन में यह भाव भी आ सकता है कि वह कोई ऐसा काम न करे जिससे उसे जेल जाना पड़े। जाहिर तौर पर जेल अपराधियों को समाज से अलग-थलग कर उन्हें उनकी करतूत का दंड देने का सबसे मुकम्मल स्थान माना जाता है। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या कैदियों के अधिकार और उनकी सुरक्षा भारतीय संविधान के दायरे में नहीं आते? ताज़ा जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत की जिला जेल में बंद एक बंदी ने दूसरे बंदी की जान लेने के इरादे से गला रेत कर हत्या करने का प्रयास किया। गंभीर हालत में घायल बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका इलाज चल रहा है।

गले पर धारदार हथियार से किया वार
दरअसल उत्तर प्रदेश में बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नवदिया सितारगंज का रंजीत 18 नवंबर से जेल में शराब के एक मामले में बंद है। आज कुछ कैदी सब्जी काट रहे थे और रंजीत भी वहां मौजूद था, तभी रंजीत का अन्य कैदियों से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि अचानक एक कैदी ने पीछे से रंजीत के गले पर धारदार हथियार से वार कर दिया। जिससे रंजीत अचेत होकर वहीं गिर गया। आनन-फानन में कारागार के पुलिसकर्मियों ने रंजीत को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। फ़िलहाल उसका इलाज चल रहा है। इस घटना से जेल प्रशासन की निगरानी की भी पोल खुल गई है। फिलहाल मामले में हमला करने वाले कैदी की जेल प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है।

जुर्म की हर वो वारदात होती रही है
वैसे तो जेल को सबसे महफूज स्थानों में गिना जाता है, यहाँ तक की दुनिया में कई जेल ऐसे है जहाँ एक परिंदा भी पुलिस की बिना मर्जी के पर नहीं मार सकता। बावजूद इसके जेल में जुर्म की हर वो वारदात होती रही है, जो आप सोच सकते हैं। फिर चाहे वो नशे की तस्करी हो, मोबाइल फ़ोन पर रंगदारी वसूलने का खेल, किसी के नाम की सुपारी देने का धंधा या फिर सीधे-सीधे क़त्ल। जेलों से अक्सर नशे की खेप भी मिलती है और मोबाइल फ़ोन भी, क़त्ल के लिए चाकू भी मिल जाता है और क़त्ल करने का मौका भी। बताया जाता है कि कई अलग अलग जेलों में इससे पहले भी कत्ल की कई वारदातें हो चुकी हैं। ये कोई इकलौता मामला नहीं है, इससे पहले भी विभिन्न जेलों की अनगिनत ऐसी तस्वीरें सामने आ चुकी हैं।

तिहाड़ जेल में हर साल क़त्ल
उदहारण के तौर पर देश की मशहूर तिहाड़ जेल में पिछले कई सालों से हर साल क़त्ल की वारदात होती रही है। साल 2017, 2018, 2019 के बाद 2020 में भी एक क़त्ल हुआ है। ये क़ैदियों के पास हथियारों की मौजूदगी का सबूत भी है। अलग-अलग वक्त पर छापेमार में नशे की खेप भी अक्सर पकड़ी जाती रही है। जेल में कैदियों की सुरक्षा को लेकर अब सरकार को गंभीरता से सोचना होगा और इसपर जल्द कोई एक्शन लेना होगा।












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