बिहार में अपराध के रास्ते पर बढ़ते युवा
पटना (मुकुंद सिंह)। पिछले दिनों बिहार में आरजेडी विधायक के बेटे ने 12 में पढ़ने वाले किशोर को सिर्फ इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी थी उसने विधायक के बेटे को ओवरटेक नहीं करने दिया। यह मात्र एक बानगी है। ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएंगे जो इसको इशारा करते हैं कि युवाओं में प्रतिशोध और अपराध की भावना बढ़ रही है। पिछले सालों से चोरी, छेड़खानी, बलात्कार हत्या, आदि जैसे संगीन अपराध में शामिल नबालिगों की बढ़ती संख्या डराने वाली है। अपराधिक घटनाओं में नाबालिक की बढ़ती संलिप्तता समाज और देश दोनों के लिए नुकसानदेह है। रॉकी की मम्मी मनोरमा देवी की लवस्टोरी तो जान लीजिए

हो सकता है कि गरीब घर के लड़के पैसों के आभाव की वजह से इस ओर प्रेरित हुए हो लेकिन अमीर घरों पर लड़के तो अहंकार के कारण अपराध के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कानून उनका क्या बिगाड़ लेगा और पैसे के बल पर वह बच जाएंगे। जरूरत इस मानसिकता को बदलने की है। इस स्थिति के लिए माता पिता भी कम जिम्मेदार नहीं है जो अपने बच्चों की हर वाजिब गैर वाजिब मांग और जिद को बचपन से ही पूरा करते रहते हैं। बिना यह सोच विचार किए कि इसका परिणाम क्या होगा और इससे हम अपने बच्चों की कैसी मानसिकता बना रहे हैं।
नतीजा नाबालिग बच्चे अपने माता पिता की बात नहीं सुनते हैं। टेलीविजन इंटरनेट और सोशल मीडिया ने बच्चों को समय से पहले व्यस्त बना दिया है। सड़कों पर खुलेआम 14 से 15 वर्ष के लड़के बिना हेलमेट के स्कूटर बाइक तो तेज रफ्तार में चलाते ही हैं साथ ही बड़ी-बड़ी गाड़ियां भी तेजी से चलाते हैं। कई बार लोगों ने यह देखा है कि नाबालिग बच्चों द्वारा तेजी से चलाए जा रहे कार और बाइक से हुए एक्सीडेंट में लोगों की मौत नाबालिगों की बिगड़ी हुई मानसिकता का ही नमूना है। लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं है।
अगर बात बच्चो के माता पिता की करें तो वे भी पहले अपने बच्चों की कारगुजारियों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं। ऊपर से इन्हें कानून का भी ध्यान नहीं है। आपको बताते चलें की नाबालिगों में बढ़ते अपराधिक प्रवृति को रोकने के लिए परिवारिक, सामाजिक और प्रशासनिक सभी स्तरो पर सजग होने की आवश्यकता है। जिसमें माता पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों की छोटी छोटी गलत हरकतों को नजरअंदाज करने की बजाय उन पर ध्यान देने और ऐसा करने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाना चाहिए। साथ ही स्कूल में नियमित रुप से बच्चों की काउंसलिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए और इस में पुलिस का भी सहयोग लेना अपेक्षित होगा।












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