नीतीश चाहेंगे तभी ससुराल जा पायेंगी बिहार की ये महिलाएं!

पटना। शादी के 10 साल गुजर गये। 'मिस ' अब मिस नहीं रहीं। मैडम बन गयी हैं, लेकिन, शादी के वर्षों बाद भी ससुराल की नहीं हो सकीं। मायके की होकर रह गई हैं। बिहार में ऐसी टीचर एक दो नहीं हजारों में हैं। दरअसल वर्ष 2006 में जब सरकारी स्कूल में शिक्षकों की बहाली (नियोजन) हुई तो उन सभी को अपने-अपने पंचायत और प्रखंड में नौकरी दे दी गई। जो पंचायत में बाहाल हुई पंचायत शिक्षिका बनीं। और, जो प्रखंड में बाहाल हुईं वो प्रखंड शिक्षि‍का बनीं। नगर पंचायत नगर परिषद और नगर निगम क्षेत्रों के स्कूल में बहाल होने वाली नगर शिक्षिका कहलायीं।

एकतरफा प्यार में टीचर ने छात्रा पर फेंका तेजाब

Thousands of Bihar women living painful life due to delay

उस वक्त बहाल होने वाली ज्यादातर टीचर महिलाएं थीं जिन्हें तब 50% आरक्षण का लाभ दिया गया था। उस वक्त बहाल हुईं महिलाओं में अधिकांश कुंवारी थीं। इसलिए जब शिक्षिका बनने के बाद स्कूल पहुंचीं, तो बच्चे उन्हें मिस कहने लगे। लेकिन दिन गुजरने के साथ उनके हाथ पीले होने लगे। शादी के बाद पिया के घर गयीं, लेकिन रहने के लिए नहीं सिर्फ रस्म अदा करने के लिए। नौकरी उनकी मजबूरी थी। ससुराल में रहतीं तो नौकरी छोड़नी पड़ती, स्कूल मायके में जो ठहरा।

इन लड़कियों के लिये नौकरी भी एक बड़ी वजह थी, जिसकी वजह से शादी में भी अड़चनें आयीं। शादी हुई चौथी पर विदाई भी, लेकिन चौथी के दास-बारह दिन के अंदर वापसी हो गई।

घरों में कटाजुज्झ

शादी के बाद भी मायके में रहने के कारण ज्यादातर टीचरों की उनकी अपनी भाभी से पटरी खाना बंद हो गई है। मायके में आने वाले रिश्तेदार भी आये दिन जली-कटी सुना जाते हैं और इस पीड़ा झेलने के लिए शिक्षिकाएं विवश हैं।

इनमें ज्यादातर टीचरें मां भी बन गई हैं। और बच्चे बड़े हो गये हैं। बच्चे चाचा-बुआ को कम मामा, मामी को ज्यादा जानते हैं। कई टीचर जो अपने मायके की बातों में नहीं भी उलझती हैं, उन्हें भी चुगली करने वाली बुआ की उपाध‍ि दे दी गई है।

ये टीचर अपने ससुराल तो जाती हैं, लेकिन केवल तब जब स्कूल में दो-चार दिन या उससे ज्यादा की छुट्टी होती है। भाभी समेत अन्य रिश्तेदारों की बातें ये टीचर केवल इस उम्मीद से झेल रही हैं, कि कभी न कभी तो ट्रांसफर का नियम बनेगा ही।

कहां फंसा है पेंच?

आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव के पहले स्थानांतरण को लेकर सेवा शर्त तय करने के लिए सरकार ने सचिव स्तरीय कमिटी बनाई थी। यह कमेटी उन महिला शिक्षकों का ट्रांसफर तय करने के लिये बनायी गई, जिनकी भर्ती मायके के जिले में हुई थी, लेकिन अब साल पूरे होने को है अब तक कमिटी की रिपोर्ट नहीं आई है।

आपको बताते चले कि हाल ही में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने ऐच्धिक स्थानान्तरण का इंतजार कर रहे नियोजित शिक्षकों आश्वस्त किया था कि 3 माह में नई सेवा शर्त लागू की जाएंगी। फिलहाल पिया का घर जाने के लिए मैडम तबादले नये नियम का इंतजार कर रही हैं। अब तो ऐसा लगता है कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे, तभी ये महिलाएं अपने ससुराल जा पायेंगी।

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