मौसम के मिजाज से होती है इस स्कूल में पढ़ाई, जानिए पूरा मामला
पटना। बिहार में चल रहे शिक्षा व्यवस्था को लेकर हर बार एक नई तस्वीर सामने आती है। कभी परीक्षा में धांधली तो कभी स्टेट टॉपर घोटाला। तस्वीर हो सामने आते ही बिहार की शिक्षा व्यवस्था और सरकार दोनों की किरकिरी हो जाती है। हालांकि इस छवि को सुधारने के लिए सरकार और विभाग दोनों कड़ी मेहनत करने में लगे हैं। लेकिन यह मेहनत सिर्फ कागजों पर ही नजर आती है। हम आज आपको शिक्षा विभाग की एक ऐसी नाकामी बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे और कहा पड़ेंगे कि जब शिक्षा विभाग हो गया बिमार तो क्यों ना बदनाम हो बिहार।

जी हां यह सुनकर आपको जरा अटपटा लग रहा होगा कि सरकार का सबसे महत्वपूर्ण विभाग कहे जाने वाला शिक्षा विभाग आखिरकार बीमार कैसे हो सकता है। तो हम आपको बताते चलें की बिहार और यूपी के बॉर्डर पर खुले आसमान के बीच चल रहे इस स्कूल की तस्वीर यह बयां कर रही है कि सूबे की शिक्षा विभाग बीमार हो गई है। उल्लेखनीय है कि यूपी और बिहार के बॉर्डर बगहा के पिपरासी प्रखंड के सेमरा-लबेदहा स्थित यह स्कूल खुले आसमान के नीचे चलता है।
मौसम के मिजाज से होती है इस स्कूल में पढ़ाई, जानिए पूरा मामला
वही इस स्कूल की सबसे बड़ी खासियत है कि यह मौसम के अनुसार चलता है। क्योंकि छत नही के होने के कारण बरसात आते ही स्कूल में छुट्टी हो जाती है तो ठंड के महीने में भी इसका हाल यही रहता है। वहीं गर्मी के महीने में जहां हर जगह 2 महीने की गर्मी छुट्टी होती है लेकिन इस स्कूल में गर्मी की छुट्टियों का कोई समय सीमा नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह स्कूल दियारा के उसी गांव में स्थित है जहां के लोगों ने हर घर में शौचालय बनवा कर खुले में शौचालय मुक्त गांव मे सबसे पहले अपना नाम दर्ज कराया था।
पर शायद आप यह विश्वास नहीं कर रहे होंगे कि स्वच्छता का मिसाल कायम करने वाले इस गांव मे शिक्षा व्यवस्था का स्तर इतना गिरा हुआ है। हालांकि यहां के ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग तथा सरकार की लचर व्यवस्था को देखते हुए अपने बच्चों के लिए इस स्कूल में एक झोपड़ी बनाई थी। पर वह भी अब जवाब देंगे लगा है। वहीं इस मामले में जब पिपरासी के बीडीओ रघुवर प्रसाद बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि मामले के बारे में कई बार वरीष्ठ अधिकारियों को लिखित जानकारी दी गई है। लेकिन अब तक किसी भी तरह का जवाब उनके पास से नहीं मिला है।
स्कूल में लगभग ढाई सौ बच्चे तथा 4 टीचर हैं। वहीं स्कूल के लिए गांव में 5 कट्ठा जमीन भी आवंटित किया गया है। आज से लगभग दो दशक पहले इस स्कूल का निर्माण किया गया था। आपको बताते चलें कि बगहा के सुदूर गांव में चल रहे इस तरह का स्कूल तो शिक्षा विभाग की नाकामी का एक जीता जागता उदाहरण है। राज्य में कई ऐसे स्कूल हैं जहां के बच्चे भगवान पर ही भरोसा कर पढ़ाई करते हुए अपने सफल जीवन की कामना करते हैं।












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