'मुद्दे से भटकाने के लिए लाउडस्पीकर और बुलडोजर पर होती है बात', तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
'मुद्दे से भटकाने के लिए लाउडस्पीकर औऱ बुलडोजर पर होती है बात', तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
पटना, 01 मई: प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बुलडोजर और लाउडस्पीकर लेकर सियासत गरमा चुकी है। तो वहीं, अब बुलडोजर और लाउडस्पीकर की सियासत में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव भी कूद गए है। रविवार को तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि असल मुद्दों से भटकाने की साजिश रची रही है। तेजस्वी ने इस दौरान केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनहित के असल मुद्दों को छोड़, सरकार लोगों को भ्रमित करने का कर रही है।
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रविवार को राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि आज किस मुद्दे पर बात हो रही है बुलडोजर और लाउडस्पीकर पर। तेजस्वी ने पूछा कि बेरोजगारी, मंहगाई, किसान, मजदूर और तरक्की के मुद्दों पर बात क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि जो असल प्रशन है जनहित के मुद्दे उनसे लोगों को भटकाया जा रहा है।
तेजस्वी ने पूछा लाउडस्पीकर विवाद की सही वजह यह है कि आपकी नींद टूट जाएगी। लेकिन जिसको रोजगार नहीं मिलने से युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो रही है इस पर चर्चा क्यों नहीं हो रही? महंगाई से कमर टूट जाएगी, लेकिन इस पर चर्चा नहीं हो रही है। चर्चा हो रही है तो बुलडोजर और लाउडस्पीकर पर।
जब लाउडस्पीकर नहीं था तो भगवान और खुदा नहीं थे क्या?
लाउडस्पीकर बैन मामले पर तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए सवाल पूछा है कि जब लाउडस्पीकर नहीं था तो भगवान और ख़ुदा नहीं थे क्या?। दरअसल, रविवार 01 मई को तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा,
लाउडस्पीकर को मुद्दा बनाने वालों से पूछता हूँ कि Loud Speaker की खोज 1925 में हुई तथा भारत के मंदिरो/मस्जिदों में इसका उपयोग 70 के दशक के आसपास शुरू हुआ। जब लाउडस्पीकर नहीं था तो भगवान और ख़ुदा नहीं थे क्या? बिना लाउडस्पीकर प्रार्थना, जागृति, भजन,भक्ति व साधना नहीं होती थी क्या?
बेवजह के धार्मिक मुद्दों को रंग देते है कुछ लोग: तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि, 'असल में जो लोग धर्म और कर्म के मर्म को नहीं समझते है वही बेवजह के मुद्दों को धार्मिक रंग देते है।आत्म जागरूक व्यक्ति कभी भी इन मुद्दों को तुल नहीं देगा। भगवान सदैव हमारे अंग-संग है। वह क्षण-क्षण और कण-कण में व्याप्त है।कोई भी धर्म और ईश्वर कहीं किसी LoudSpeaker के मोहताज नहीं है।'












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